बसपा के राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा है कि भाजपा और सपा का जनाधार खिसक चुका है। ये दोनों ही पार्टियां 2017 के विधानसभा चुनावों से पहले यूपी में बड़ा दंगा करा सकती हैं, लेकिन उनको यहां पर मुंह की खानी पड़ेगी। प्रदेश की जनता दोनों पार्टियों के मंसूबे को जान चुकी है। नसीमुद्दीन सिद्दीकी बुधवार को शाहबाद के रामलीला मैदान में पार्टी की ओर से आयोजित एक दिवसीय कैडर कैंप को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने केंद्र की भाजपा सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली सरकार ने स्थिति बद से बदतर कर दी है। लोकसभा चुनावों के वक्त मोदी ने नारा दिया था, अच्छे दिन आने वाले हैं। क्या यही अच्छे दिन हैं? आज लोगों के पास खाने को रोटी नहीं है। किसान बेहाल और परेशान हैं। केंद्र सरकार ने किसानों को एक पैसे का मुआवजा नहीं दिया। प्रदेश की अखिलेश सरकार के राज में तो लोगों का जीना दूभर है। 2007 में जब प्रदेश में बसपा की सरकार आई तो गन्ने का मूल्य 125 रुपये और 2012 में 280 रुपये प्रति क्विंटल था।
सपा की सरकार ने गन्ने का रेट तो बढ़ाया नहीं, किसानों के 50 रुपये और काट लिया। उन्होंने कहा कि भाजपा और सपा की नीतियां दलित विरोधी हैं। दोनों ही पार्टियां आरक्षण की विरोेधी हैं। नरेंद्र मोदी दलितों का आरक्षण जारी रखने की बात कहते हैं, लेकिन उनकी सरकार का रिमोट कंट्रोल जिस व्यक्ति के हाथ में (आरएसएस प्रमुख) वो आरक्षण समाप्त करने की बात कहते हैं। सपा ने आरक्षण समाप्त करने का विधेयक विधानसभा में पास करा दिया, लेकिन इसको हमने विधान परिषद में गिरा दिया।
सपा सरकार ने फरमान जारी कर दिया है कि मदरसों में इम्तहान नहीं होंगे। इस दौरान बसपा के जोन कोआर्डिनेटर गिरीश चंद्र, अतर सिंह राव, लोकमन सागर, चरन सिंह सागर, मंडल कोआर्डिनेटर सरवन सिंह सागर, योगंबर सिंह, रामजीवन गौतम, जिलाध्यक्ष रविंद्र सिंह रवि, विधायक यूसुफ अली, हाजी बिट्टन, एमएलसी सुबोध पराशर, पूर्व मंत्री हाजी अकबर, पूर्व मंडल कोआर्डिनेटर सुरेंद्र सिंह सागर, डा. तनवीर अहमद खां, अमरीश पटेल, प्रदीप गंगवार, हमजा मियां, राजेश सैनी, प्रेमपाल सैनी, महेश सागर रहे।