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मन का प्रदूषण दूर करो, बाहरी पर्यावरण खुद हो जाएगा स्वच्छ

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रामपुर। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान से आईं सुरजीता भारती ने कहा कि गोविंद पूजन भी तब ही सार्थक है जब आप प्रकृति से प्रेम करें। जब-जब मानव संतों के आकर्षण का परित्याग करते हुए भोग वासना की ओर अग्रसर होता है, तब-तब समाज रूपी गंगा विषाक्त होती है। मन का प्रदूषण दूर करने से बाहरी पर्यावरण स्वत: ही स्वच्छ हो जाएगा।
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आदर्श कालोनी स्थित होली पार्क में चल रही तीन दिवसीय श्री हरि कथा में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान से आईं साध्वी सुरजीता भारती जी ने कथा के द्वितीय दिवस प्रभु श्री राम की कथा का गुणगान किया। उन्होंने कहा कि सीता स्वयंवर में गुरु विश्वामित्र ने भगवान श्री राम को गंगा की महिमा के बारे में बताया है। गंगा उद्गम से लेकर सागर विलय तक भारत के विशाल भू-भाग को स्पर्श करती हुई अपने आप में सभ्यता और संस्कृति के इतिहास का जीवंत साक्ष्य है। गंगा केवल नदी नहीं बल्कि, भारतीय संस्कृति की संवाहिका है। हमारे शास्त्रों ने गंगा और गोविंद को एक सामान माना है। उनमें कोई फर्क नहीं रखा, दोनों पूज्यनीय है। मनुष्य घरों में गोविंद की तो पूजा करता है, परंतु गंगा में जाकर सब कुछ विसर्जित कर उसे प्रदूषित कर रहा है। ऐसे में गोविंद की पूजा कैसे सार्थक होगी। इसके लिए ब्रह्मज्ञान की आवश्यकता पड़ती है। ब्रह्मज्ञान मानसिक शुद्धता का सशक्त साधन है। साध्वी जी ने सुंदर-सुंदर भजन सुनाए, जिसे सुन श्रोता मंत्र मुग्ध हो गए। भास्कर अग्रवाल , नेहा अग्रवाल,अनिता अग्रवाल, राकेश गुप्ता, राधा गुप्ता, ओम प्रकाश, राजीव रस्तोगी , सीमा रस्तोगी, मीरा कश्यप, संजीव रस्तोगी आदि मौजूद रहे।
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