बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों की कमाई पर भ्रष्ट तंत्र की नजर लग गई है। हर माह एक-एक पाई कर जोड़ी रकम जोड़ने की कवायद को भ्रष्ट बाबू झटका दे रहे हैं। करीब चार हजार से ज्यादा शिक्षकों की मासिक रूप में होने वाली करोड़ों की धनराशि की घपलेबाजी की गई है। मामले का खुलासा होेने के बाद शिक्षकों में बैचेनी है। साथ ही विभाग में भी हड़कंप मच गया है।
बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों को मासिक बचत कराने के लिए डाक विभाग के माध्यम से बेसिक शिक्षा विभाग ने आरडी खोली थी। वर्ष 2013 में करीब तीन हजार से ज्यादा शिक्षकों की आरडी खातों को डाकघर के माध्यम से खोल दिया गया। इस तरह तकरीबन 15 लाख रुपये प्रति माह के हिसाब से बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा डाकघर में जमा किया जाना शुरू कर दिया गया था। उस वक्त मैनुअल तरीके से विभाग की ओर से शिक्षकों की आरडी जमा होने लगी लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग के लेखा कार्यालय की ओर से शिक्षकों की आरडी में जमा करने के लिए पांच-पांच सौ रुपये की कटौती तो कर ली गई,लेकिन यह राशि डाकघर में खोले गए शिक्षकों के खाते में जमा नहीं की गई।
तकरीबन डेढ़ साल तक कटौती होती रही,लेकिन जब कुछ शिक्षकों की आरडी पूरी हो गई तो उन्होंने जब इसकी जानकारी ली तो पता चला कि उनके आरडी खाते में विभाग की ओर से धनराशि जमा ही नहीं की गई। यानि शिक्षकों से धनराशि काटी तो गई लेकिन उनके खाते में जमा नहीं की गई। करीब दो हजार से ज्यादा शिक्षक ऐसे हैं जिनकी धनराशि को उनके खाते में जमा नहीं किया गया। लिहाजा अब करोड़ों रुपये का घोटाला सामने आने की आशंका जताई जा रही है। शिक्षक संघ लगातार इस मुद्दे को उठा रहा है,लेकिन लेखा विभाग कहीं न कहीं इस मामले को दबाने में लगा हुआ है। काफी हद तक लेखा विभाग इसमें कामयाब भी हो गया है। लेखा विभाग के बाबुओं ने कुछ शिक्षक नेताओं से साठगांठ तक कर ली और मामले को दबाने में लग गए हैं।