रामपुर के वार्ड चार के भाजपा समर्थित सभासद विनोद कश्यप को प्रशासन ने झटका दिया है। पांच सदस्यीय अफसरों की जांच कमेटी ने तहसीलदार सदर द्वारा फर्जी तरीके से बनवाए गए जाति प्रमाण के निरस्त करने के फैसले वैध ठहरा दिया है। पांच सदस्यीय कमेटी ने भी सभासद के अनुसूचित जाति के प्रमाण पत्र को फर्जी मानते हुए जाति प्रमाण पत्र को निरस्त कर दिया है।
फर्जी जाति प्रमाण पत्र के जरिए चुनाव लड़ने और जीतने का यह मामला करीब साल भर पुराना है। पिछले साल चार मई को नगर पालिका के चुनाव हुए थे,जबकि 13 मई को मतगणना हुई थी। शहर के वार्ड चार को चुनाव में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया था। इस वार्ड से भाजपा समर्थित प्रत्याशी विनोद कश्यप जीते थे।
उनके प्रतिद्वंदी आशीष सागर ने चुनाव के दौरान ही प्रशासन से शिकायत की थी कि विनोद कश्यप ने अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र फर्जी तरीके से बनवाया है। विनोद कहार जाति से हैं और यह जाति पिछड़ा वर्ग में आती है। इस शिकायत को संज्ञान में लेते हुए तहसीलदार ने मामले की जांच की थी।
जिसके बाद तहसीलदार सदर ने 12 मई 23 को विनोद कश्यप का जाति प्रमाण पत्र फर्जी मानते हुए उसे निरस्त कर दिया था। तहसीलदार के इस फैसले को चुनौती दी गई। जिलाधिकारी के निर्देश पर 27 जून को अपर जिलाधिकारी प्रशासन, डिप्टी कलेक्टर देवेंद्र प्रताप को जांच सौंपी गई। बाद में डीएम के आदेश पर स्क्रूटनी समिति का गठन किया गया।
जिसमें जिला समाज कल्याण अधिकारी, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी को भी शामिल किया गया। स्क्रूटनी समिति ने सुनवाई के बाद सभी तथ्यों पर गौर किया और दोनों ओर से पुख्ता सुबूत रखे गए। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद स्क्रूटनी समिति ने माना कि सभासद विनोद कश्यप कहार जाति के हैं।
उन्होंने फर्जी तरीके से अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र प्राप्त किया है। समिति ने तहसीलदार के पूर्व के फैसले को ठीक मानते हुए फर्जी तरीके से बनवाया गया अनुसूचित जाति के तुरैहा जाति के प्रमाण पत्र को खारिज कर दिया। जिलाधिकारी जोगिंदर सिंह ने भी फर्जी जाति प्रमाण पत्र को निरस्त करने का निर्देश जारी कर दिया है।
स्क्रूटनी समिति के फैसले को देंगे चुनौती
उनका प्रमाण पत्र सही है। पहले तहसीलदार और फिर अब जिला स्तरीय कमेटी ने जो फैसला लिया है। इस फैसले को अब मंडल स्तर पर चुनौती दी जाएगी। उन पर आरोप गलत तरीके से लगाए गए हैं। - विनोद कश्यप, सभासद वार्ड चार