नोटबंदी के बाद कैश की किल्लत लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रही है। बृहस्पतिवार की रात तबीयत बिगड़ने पर कई दिनों से बीमार वृद्धा की मौत हो गई। परिजनों के मुताबिक, डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया था लेकिन पास में पैसे नहीं थे। महिला का बेटा कई दिनों से बैंक के चक्कर काट रहा था लेकिन रुपया नहीं मिला। महिला की मौत से परिजनों में कोहराम मच गया है।
क्षेत्र के ग्राम सिकंदराबाद निवासी नरेनिया पत्नी रामस्वरूप (65) तीन दिसंबर से बीमार थीं। परिजनों ने पहले निजी चिकित्सकों को दिखाया। लेकिन डाक्टरों ने पुराने नोट लेने से इंकार कर दिया। इसके बाद परिजन उन्हें लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। डॉक्टरों ने हालत गंभीर देख उनको बेहतर इलाज के लिए कहीं और लेकर जाने को कहा।
परिजनों के मुताबिक, उनके पास नई करेंसी नहीं थी। नरेनिया का बेटा हरपाल सिंह पुराने नोट बदलने व नए नोट के लिए कई दिनों से बैंकों में लाइन में लग रहा था लेकिन कैश नहीं मिल पा रहा था। बृहस्पतिवार की रात में महिला की तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। जिससे परिजनों में कोहराम मच गया।