रामपुर। चंद्रपाल और कुसुम दोनों ही एक पैर से निशक्त थे। अपंगता शादी में बाधक बन रही थी लेकिन मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह में दोनों एक हो गए। सात फेरे लेकर एक दूसरे का सहारा बन गए। दोनों परिवारों ने वर-वधु को आशीर्वाद दिया।
भोट बक्काल के रहने वाले 30 वर्षीय चंद्रपाल बताते है कि जन्म से ही वह एक पांव से निशक्त है, लेकिन उन्होंने कभी इसको कमजोरी नहीं माना। हमेशा अपना हौसला और इरादे बुलंद रखे। पांव से दिव्यांग होने की वजह से वह पढ़ाई करने नहीं जा सके। अपने पिता हेतराम के साथ वह खेती किसानी में उनका हाथ बटा देते है। उनकी इस कमजोरी के लिए मां-पिता ने कभी उनका साथ नहीं छोड़ा और कंधे से कंधा मिलाकर साथ चले।
वह परिवार के इकलौते थे तो पिता ने उनकी शादी का विचार बना लिया। कई जगहों पर रिश्ते की बात चलाई, लेकिन हर जगह से उनकी अपंगता आड़े आ गई। इस बीच किसी रिश्तेदार ने अजीतपुर में रिश्ते की बात चलाने के लिए कहा तो परिवार कुसुम को देखने के लिए चला गया। कुसुम भी दाहिने पांव से निशक्त हैं और बैसाखी ही उनका सहारा बना हुआ है।
दोनों की समस्या एक होने के बाद एक दूसरे को संभालने के लिए परिवारों ने रिश्ता जोड़ दिया। सामूहिक विवाह में जब वह पहुंचे तो हर किसी की नजरें उन पर थी। बैसाखी के सहारे वह विवाह की वेदी तक पहुंचे और कुसुम संग विवाह रचाया। सामूहिक विवाह में इस जोड़े को हर किसी ने आशीर्वाद दिया।