रामपुर। नई बस्तियों में आबादी तो बढ़ गई, लेकिन न ही सीवर डाली जा सकी और न ही सड़कें बन सकीं। हालांकि, जिले में चार जोन में सीवर लाइन स्वीकृत हुईं थी लेकिन, शहर के सिर्फ दो जोन में ही सीवर डाली जा सकी है। जबकि, बाकी इलाके में काम नहीं हो सका। हालांकि, अब जल निगम की ओर से कहा जा रहा है कि अमृत-2 योजना में बाकी इलाकों में सीवर लाइन बिछाने का प्रस्ताव रखा जाएगा।
रामपुर शहर की बात की जाए तो शहर के बाहरी इलाकों में आबादी का विस्तार हो गया है। पहाड़ी गेट के साथ ही डिग्री कालेज के पास, मंडी समिति के पास, मोहल्ला नालापार के पास, सिविल लाइंस स्थित शिवापुरम कालोनी, पनवड़िया, ज्वालानगर स्थित विष्णु विहार कालोनी, सांई विहार आदि नई-नई कालोनियां बन गईं। किन्तु, इन कालोनी में सुविधाएं नहीं बढ़ सकीं। कई स्थानों पर न तो पीने का बेहतर पानी है और न ही नगर पालिका की पेयजलापूर्ति। यहां तक कि सड़कें भी कच्ची हैं। वहीं, इन कालोनियों में सीवर लाइन तक नहीं डाली जा सकी है।
हालांकि, ऐसा नहीं है कि रामपुर में सीवर पर काम नहीं हुआ। शहर को गंदगी से निजात दिलाने के लिए 2005 में रामपुर में सीवेज सिस्टम प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई थी। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की जिम्मेदारी सीएंडडीएस (कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज) को सौंपी गई। सीएंडडीएस ने प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए शहर को चार जोन में बांट दिया। जिसके बाद जोन एक और जोन दो के लिए अलग-अलग सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी बने। पहले जोन में 65.97 किलोमीटर, जबकि दूसरे जोन में 78 किलोमीटर सीवर लाइन डाली गई। पहले जोन का घाटमपुर और दूसरे जोन का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट केमरी रोड पर पहाड़ी गांव के पास बनाया गया। बसपा सरकार में यह काम लटक गए, जिसके बाद अखिलेश सरकार में इस प्रोजेक्ट पर फिर से काम हुआ। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद सरकार ने ही लोगों के कनेक्शनों के लिए सीवर चैंबर बनाने का काम किया था, जिसमें 7070 सीवर चैंबर बनाए गए थे। इसके लिए सरकार ने 21 करोड़ रुपये खर्च हुए थे।
किन्तु, जोन तीन व जोन चार में सीवर लाइन नहीं बिछाई जा सकी। सपा सरकार में सिर्फ सर्वे ही हो सका था, जबकि काम आगे नहीं बढ़ सका था। लिहाजा, जोन तीन यानी सिविल लाइंस और जोन चार ज्वालानगर में सीवर का काम नहीं हो सका। ऐसे में इन इलाकों में तमाम गंदगी नालियों में ही बहती रहती है। हालांकि, लोगों की मांग है कि ज्वालानगर और सिविल लाइंस में भी सीवर लाइन डाली जाए, जिससे लोगों को गंदगी से निजात मिल सके। जल निगम के अफसरों की माने तो भारत सरकार ने अमृत-2 के नाम से नई योजना शुरूकी है, जिसके बाद विभाग दोनों इलाकों में सीवर लाइन डालने का प्रस्ताव रखेगा।
कोट
सिविल लाइंस में सीवर लाइन नहीं डाली जा सकी है। ऐसे में गंदगी नालियों में ही बहती रहती है। दिक्कत बरसात के दिनों में अधिक होती है, जब नालियां बंद हो जाती हैं और पूरी गंदगी सड़क पर बहती है। इस समस्या से निजात मिलनी चाहिए। -रमेश कुमार, निवासी सिविल लाइंस।
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डूंगरपुर में सीवर लाइन नहीं है। सपा सरकार में सीवर लाइन डालने का काम हुआ था, लेकिन सिर्फ आधे शहर में ही सीवर लाइन डाली गई थी। सरकार को चाहिए कि गंदगी दूर करने के लिए बाकी क्षेत्रों में भी संतुलित कार्य कराए जाएं, जिससे लोगों को सुविधा हो। -कन्हैया लाल, निवासी डूंगरपुर।
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सीवर लाइन न होना एक बड़ी समस्या है। कई बार नालियों की समय रहते सफाई नहीं हो पाती, जिस कारण नालियों का पानी सड़कों पर जमा हो जाता है। इससे गंदगी फैलती है। समस्या को दूर करने के लिए सीवर लाइन डाली जानी चाहिए। -हेम प्रताप सिंह, निवासी सिविल लाइंस।
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शहर में सिर्फ कुछ ही इलाकों में सीवर है। लेकिन, स्वच्छता आधे अधूरे कामों से नहीं आएगी। इसके लिए सरकार को चाहिए कि बाकी क्षेत्रों में सीवर लाइन की सुविधा उपलब्ध कराए, जिससे लोगों की समस्या दूर हो सके। -बकार खां, निवासी डूंगरपुर।
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शहर में सीवर लाइन का काम दो जोन में हुआ है, जबकि दो जोन रह गए हैं। अब सरकार ने अमृत-2 योजना शुरू की है। इस योजना में प्रस्ताव रखा जाएगा। पूरा प्रयास रहेगा कि जहां जहां सीवर लाइन नहीं है, वहां सीवर लाइन पहुंचाई जाए। -मोहित राय, अधिशासी अभियंता, जल निगम, रामपुर।