नारी को अबला कहने के दिन लद गए। बेशक समाज पुरुषप्रधान है। लड़कों के बरअक्स लड़कियों को कम आजादी है। आज भी कई रूढ़िवादी घरों में लड़कियों की दुनिया को चूल्हे-चौके तक महदूद करने की कोशिश होती है। लेकिन इसके बावजूद लड़कियों ने अड़ना और हालात से लड़ना सीख लिया है। चाहे सियासत हो अथवा शिक्षा, खेल का मैदान हो अथवा कारोबार महिलाओं ने अपने हौसले और जुनून से अपनी ताकत का अहसास करवा दिया है। कई महिलाएं खुदमुख्तार हैं।
अपने फैसले खुद लेती हैं। नवाबी नगरी रामपुर में महिलाओं की दास्तां मुल्क के अन्य हिस्सों से अलग नहीं है। पुरुषों प्रधान समाज का नजरिया इस इलाके में कायम है। कामयाबी की डगर पर कदम-कदम पर बाधाएं हैं। पांवों में परंपरा और कुप्रथा की बेड़ियां हैं। इसके बाद भी नारी शक्ति हर क्षेत्र में कहीं न कहीं अपनी शक्ति को दिखा रहा है। सियासत हो या फिर शिक्षा और या फिर व्यापार जगत।
हर क्षेत्र में नारी शक्ति सफलता के कदम चूम रही है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) के अवसर पर अपनी राह चुनने के बाद अपनी मंजिलें खुद हासिल करने वाली, कामयाबी की नई इबारत लिखने वाली कुछ महिलाओं की सफलता की कहानी पेश है।