रामपुर रियासत की नींव रखने के बाद से ही सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल कायम हो गई। नवाबी दौर से आज तक लोग ईद हो या दीवाली और होली मिलजुल कर मनाते आ रहे हैं। होली तो अलग अंदाज में मनाई जाती है। मुस्लिम परिवारों में भी खूब गुलाल उड़ता है और घरों में गुझिया महकती हैं। नवाबों के घरों में भी होली के पकवान तैयार होते है। यह परंपरा अभी भी कायम है।
नवाब फैजुल्लाह खां रामपुर रियासत के संस्थापक थे। रामपुर नगर 1775 में बसाया गया था उसी दिन यहां सांप्रदायिक सैहार्द की मिसाल कायम होना शुरू हो गई। नवाबों ने जहां मस्जिदों की तमीर कराई वहीं मंदिरों का भी निर्माण कराया। मुस्लिमों के घरों में भी गुलाल उड़ता और घरों में गुझियां बनती थीं। नवाबों के घरों में भी होली के पकवान तैयार होते थे। नवाबों की बेगमों के लिए भी अलग इंतजाम होता था।
होली के पकवानों की तैयारी कई दिन पहले से शुरू कर दी जाती थी। ेहिंदु भाई ईद की मुबारकबाद को मुसलमान होली की मुबारकबाद देते हैं। होली या ईद गले मिलकर एकता और भाईचारे की रस्में पूरी की जाती हैं। भले ही अब रियासत नहीं रही पर नवाबों ने जो सौहार्द की मिसाल कायम की थी वह आज भी बरकरार है।