रामपुर। जनपद न्यायाधीश व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष गौरव कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि 11 सितंबर को तहसील स्तर से उच्च न्यायालय तक पूर्ण भारत वर्ष में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है। राष्ट्रीय लोक अदालत में आकर शीघ्र, सुलभ और सक्षम न्याय पाएं। न्याय शुल्क वापस प्राप्त कर आपसी भाईचारा बढ़ाएं।
राष्ट्रीय लोक अदालत 11 सितंबर को किसी भी न्यायालय अथवा विभागीय मामलों को सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारित किए जाने के लिए आवेदन-पत्र देकर अंतिम आदेश व निर्णय प्राप्त कर सदैव के लिए लंबित मामले से छुटकारा पाने का स्वर्णिम अवसर साथ ही साथ यह भी बताया कि सस्ता, सुलभ न्याय प्रत्येक भारतीय नागरिक का मौलिक अधिकार है। उन्होंने लोक अदालत के लाभ के बारे में बताया कि पक्षों के मध्य आपसी सुलह-समझौते के आधर पर विवाद का निस्तारण, पक्षकार व्यक्तिगत स्तर पर स्वयं पहल कर सकता है। लंबित मामलों के लोक अदालत में निस्तारण कर न्याय शुल्क की वापसी की व्यवस्था। लोक अदालत द्वारा पारित निर्णय के विरुद्ध कोई अपील नहीं। कानूनी जटिलताओं से परे लोक अदालत की प्रक्रिया सहज और आपसी समझौते पर आधारित है। राष्ट्रीय लोक अदालत में संदर्भित किए जाने योग्य वाद व मामले छोटे-छोटे जितने भी मुकदमे हैं, उनका सुलह-समझौते के आधार पर निस्तराण किया जा सकता है। चाहे वह भरण-पोषण से संबंधित हों, चाहे वह मोटर दुर्घटना प्रतिकर के हों, सिविल प्रकृति के वाद हों, शमनीय अपराध के वाद हो, प्री-लिटिगेशन स्टेज पर बैंक ऋण, जल कर, गृह कर एवं अन्य छोटे-छोटे वादों का निस्तारण किया जा सकता है। आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत 11 सितंबर को सफल बनाए जाने के लिए प्री-लिटिगेशन के लगभग 4000 वाद एवं न्यायालय के लंबित 2323 वाद इस प्रकार अब तक कुल 6323 वाद नियत किए जा चुके हैं। यातायात पुलिस के द्वारा किए गए मोटर वाहन चालानों में जारी किए गए नोटिस व सममन प्राप्त हुआ हो या नोटिस या समन जारी न हुआ हो, उसके उपरांत भी सभी मोटर वाहन चालानों का निस्तारण आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत में किया जा सकता है।