रामपुर/दढ़ियाल । रामनगर बैराज से कोसी नदी में लगातार पानी छोड़े जाने की वजह से कोसी नदी उफान पर है। आलम यह है कि कोसी नदी खतरे के निशान (समुद्रतल से 211 मीटर) से ऊपर बह रही है। यहां तक कि दढ़ियाल में नैनीताल हाईवे पर भी कोसी नदी का पानी आ गया है। इस कारण प्रशासन ने दढ़ियाल-बाजपुर-नैनीताल मार्ग को बंद करा दिया है। शाम के समय तो पानी पुल के बराबर से पास हो रहा था। ऐसे में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। लोगों में अफरा-तफरी का माहौल है। खेत जलमग्न हो गए हैं।
रविवार से उत्तराखंड के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में लगातार हो रही बारिश से रामनगर बैराज पर पानी का अत्यधिक दबाव बन गया था। इसके चलते बैराज से सोमवार शाम 42510 क्यूसेक और मंगलवार तड़के 146000 क्यूसेक पानी कोसी नदी में छोड़ा गया। पानी छोड़े जाने से मंगलवार को दढ़ियाल में कोसी नदी अपने पूरे उफान पर आ गई। देखते ही देखते नदी का पानी दोपहर से पहले ही खतरे के निशान को पार कर गया।
पानी में अकबराबाद, रामपुर धम्मन, दढ़ियाल, मिलक सिटला, घोसीपुरा आदि गांवों के किसानों की सैकड़ों एकड़ गन्ना, उड़द, धान और चारे की फसल डूब गई। इससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आईं। अकबराबाद के पास काशीपुर मार्ग और स्वार क्षेत्र के ग्राम मुंशीगंज के पास बाजपुर मार्ग पर कोसी नदी का पानी उतरने लगा। पानी के लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने दढ़ियाल-काशीपुर मार्ग और दढ़ियाल-बाजपुर मार्ग पर वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दी।
वहीं, एहतियात के तौर पर दढ़ियाल में कोसी नदी के पुल को भी खाली कराकर बैरिकेडिंग लगा दी गई है। शाम तक तो पानी पुल के बराबर से पास हो रहा था। टांडा एसडीएम ज्योति गौतम, तहसीलदार राकेश चंद्रा, टांडा कोतवाल गजेंद्र सिंह व सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और ग्रामीणों को जंगल न जाने की हिदायत दी है। दढ़ियाल और अकबराबाद में बाढ़ चौकियों को सतर्क कर दिया गया है और अधीनस्थों को लगातार स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
कोसी का जलस्तर बढ़ा, तो गांवों में घुसने लगा पानी
चारों ओर से कई फिट पानी होने के चलते गांवों का संपर्क कटा
मसवासी। मूसलाधार बारिश व रामनगर बैराज से भारी मात्रा में छोड़े गए पानी से कोसी नदी का पानी तेज बहाव के साथ नदी से सटे गांवों में घुसने लगा है। इससे ग्रामीणों में दहशत है। लोगों ने घरों की छतों पर अपना आशियाना बना लिया है।
पहाड़ी व मैदानी इलाकों में हुई मूसलाधार बारिश ग्रामीणों के लिए मुसीबत साबित हो रही है। मंगलवार को कोसी नदी का जलस्तर बढ़ा, तो न सिर्फ किसानों की फसलें डूबीं, बल्कि कई गांवों में पानी घुस गया। क्षेत्र के गांव जमना-जमनी, बेलवाड़ा और चौहद्दा समेत कई गांवों में कोसी नदी का पानी आ गया। ऐसे में बढ़ते जलस्तर के चलते जमना-जमनी के ग्रामीणों ने मकानों की छत पर बैठकर रात गुजारी। चारों ओर से कई फिट पानी होने के चलते गांव का अन्य गांवों से संपर्क कट गया है।
किसानों ने खेतों पर जाना भी बंद कर दिया है। घोसीपुरा-पट्टीकलां गांव में रामनगर बैराज से छोड़े गए पानी से कोसी पुल सहित रेलवे पुल पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। दोनों पुलों से रेड निशान से ऊपर पानी बह रहा है। स्वार एसडीएम यमुनाधर चौहान ने ग्रामीणों से सतर्कता बरतने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा है कि प्रशासन पूरी तरह से मदद में जुटा हुआ है।
कोसी नदी के पानी में बहकर आया हिरन और मोर
दढ़ियाल/मसवासी। कोसी नदी के तेज बहाव से जंगली पशु पक्षियों की भी मुसीबत बढ़ गई है। मंगलवार को जब नदी से सटे गांवों में पानी घुसना शुरू हुआ, तो पानी के बहाव में पशु-पक्षी भी आ गए। दढ़ियाल के ग्राम रामपुर धम्मन में कोसी नदी के पानी में हिरन का बच्चा बहकर आ गया। ग्रामीणों ने पानी में से हिरन के बच्चे को निकाला तो वह घायल अवस्था में था। ग्रामीणों ने तुरंत उच्चाधिकारियों को जानकारी, जिसके बाद पशुधन प्रसार अधिकारी डॉ. संजीव चौधरी मौके पर पहुंचे। उन्होंने हिरन के बच्चे का इलाज किया। जबकि, मसवासी के ग्राम चौहद्दा में कोसी नदी में राष्ट्रीय पक्षी मोर भी बहता हुआ आता दिखाई दिया। ग्रामीणों ने मोर को निकाल निजी चिकित्सक से इलाज कराया।