गांव के छोटे से लेकर बड़े कारोबारी पर जिला पंचायत के टैक्स का बोझ बढ़ जाएगा। गांव-गांव फेरी लगाकर अपना और परिवार का पेट पालने वालों से भी ज्यादा टैक्स वसूला जाएगा। जिला पंचायत ने प्रस्तावित उप विधियों पर आपत्ति मांगी है। वैसे से तो जिला पंचायत की आमदनी के कई जरिये हैं, लेकिन ज्यादा खर्च के सामने आमदनी कम पड़ रही है।
लिहाजा जिला पंचायत ने ग्रामीण क्षेत्र में दुकान, फेरी लगाने वाले, पेट्रोल पंप, ढाबे समेत 67 तरह के कारोबार के संचालन को नियमित और नियंत्रित करने संबंधी प्रभावी उपविधि के उप नियम संख्या (2) में संशोधन प्रस्तावित किया है। जिला पंचायत छोटे से लेकर बड़े कारोबार पर लाइसेंस शुल्क टैक्स बढ़ाएगी।
मसलन घड़ी मरम्मत की दुकान से लाइसेंस शुल्क के रूप में 110 से बढ़ाकर 200 रुपये वसूले जाएंगे। इसी तरह चाय, बीड़ी सिगरेट, जूता मरम्मत, कपड़ों की सिलाई की दुकान पर लाइसेंस शुल्क बढ़ा दिया जाएगा। जिला पंचायत ने प्रस्तावित दुकानात उपविधियों पर 18 अक्तूबर तक आपत्ति मांगी है। इसके बाद आपत्ति पर विचार नहीं किया जाएगा।
जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी सीपी सिंह राघव ने बताया कि जिला पंचायत की आमदनी बढ़ाने के लिए ग्रामीण क्षेत्र में कारोबार पर लाइसेंस शुक्ल और टैक्स बढ़ाने का प्रस्ताव बोर्ड ने पास किया था। बोर्ड से मंजूरी मिलने पर प्रस्तावित उपविधियों पर आपत्ति मांगी गई है। आपत्तियों के निस्तारण और बाकी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद फाइल कमिश्नर को भेजी जाएगी। कमिश्नर से अनुमोदन के बाद यह मामला शासन को भेज दिया जाएगा।