रामपुर। जौहर विवि के गेट के मामले में सेशन कोर्ट का फैसला आने के बाद अब लोक निर्माण विभाग को गेट हटाने की कार्रवाई को लेकर प्रशासन के निर्देशों की प्रतीक्षा है। वहीं, जिलाधिकारी ने कोर्ट के आदेश की प्रमाणित कॉपी मिलने के बाद आदेशों के आधार पर आगे की कार्रवाई करने की बात कही है।
भाजपा लघु उद्योग प्रकोष्ठ के क्षेत्रीय संयोजक आकाश सक्सेना ने जौहर विवि गेट को लेकर मुख्यमंत्री से शिकायत की थी। उनका आरोप था कि सींगनखेड़ा से लालपुर डैम तक लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड की ओर से सड़क का निर्माण किया गया था। तब 11.5 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण हुआ था, जिसमें से करीब साढ़े तीन किलोमीटर सड़क जौहर विश्वविद्यालय के अंदर है। सरकारी धन से सड़क का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण होने के बाद के बाद सार्वजनिक परिसंपत्ति का सृजन हुआ है। आरोप था कि सींगनखेड़ा की चैनेज पर सड़क पर विश्वविद्यालय की ओर से मुख्य द्वार बनवा दिया गया है, जबकि बंधे की तरफ दीवार का निर्माण करा दिया है। इससे लोक निर्माण विभाग का गेस्ट हाउस एवं सार्वजनिक आवागमन बाधित हो गया। विभाग के मुताबिक ऐसा करना अतिक्रमण एवं अनधिकृत कब्जे की श्रेणी में आता है। इस मामले की जांच के बाद लोक निर्माण विभाग नेे विवि प्रबंधन को नोटिस जारी किया था।
इसके बाद लोक निर्माण विभाग ने एसडीएम सदर की कोर्ट में पीपी (पब्लिक प्रेमीसेस) एक्ट के तहत वाद दायर कर दिया। 25 जुलाई 2019 को एसडीएम सदर के न्यायालय ने फैैसला सुनाते हुए विवि प्रबंधन को 15 दिन के भीतर गेट हटाने का आदेश दिया था। इसके बाद इस मामले को लेकर सेशन कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। जहां पर कोर्ट ने पूरे मामले को सुनकर सोमवार दो अगस्त को गेट हटाए जाने को लेकर एसडीएम कोर्ट के फैसले को यथावत रखने के आदेश दिए। कोर्ट ने क्षतिपूर्ति व जुर्माने को लेकर एसडीएम कोर्ट के फैसले में आंकड़ागत बदलाव किया है।
सेशन कोर्ट का फैसला आने के बाद अब लोक निर्माण विभाग को गेट हटाने को लेकर प्रशासनिक अफसरों के दिशा निर्देशों का इंतजार है। वहीं प्रशासन इस मामले में कोर्ट के आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के बाद ही न्यायिक प्रक्रिया के तहत कोर्ट के आदेशों के अनुपालन कराए जाने की बात कह रहा है।