रामपुर। कारतूस कांड में गवाह के वारंट जारी होने के बाद शनिवार को एसटीएफ के दरोगा कोर्ट पहुंचे। उनसे बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने जिरह की। उनकी जिरह पूरी हो गई है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 18 जून को होगी।
सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में 26 अप्रैल 2010 को लखनऊ एसटीएफ की टीम ने स्थानीय पुलिस के साथ राम-रहीम पुल के नीचे से पीएसी के सेवानिवृत्त दरोगा यशोदानंदन को गिरफ्तार करते हुए कारतूस कांड का खुलासा किया था। एसटीएफ ने इस दौरान सीआरपीएफ के हवलदार विनोद और विनेश को भी गिरफ्तार किया था। एसटीएफ ने आरोपियों के कब्जे से बड़ी मात्रा में नकदी और कारतूस बरामद किए थे। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही और पूछताछ के आधार पर मुरादाबाद पीटीसी में तैनात आर्मेरर नाथीराम सैनी को भी गिरफ्तार किया था। यशोदानंदन की निशानदेही पर इलाहाबाद, कानपुर, झांसी, मऊ आदि जनपदों से भी अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। कोर्ट में ट्रायल के दौरान मुख्य आरोपी यशोदानंदन की मौत हो चुकी है। इस मामले में पुलिस ने विवेचना के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।
यह मामला एडीजे द्वितीय विजय कुमार की कोर्ट में चल रहा है। एसटीएफ के दरोगा राजकुमार पिछली तारीखों पर गवाही देने के लिए नहीं आए, जिसके बाद कोर्ट ने कड़ा रूख अख्तियार करते हुए उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए थे। जिस पर शनिवार को दरोगा राजकुमार गवाही के लिए कोर्ट पहुंचे, जहां पर बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने उनसे जिरह की। उनकी जिरह पूरी हो गई है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता देवेंद्र कुमार नंदा ने बताया कि कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 18 जून की तारीख तय की है।