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मुनाफे के लालच में लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे मछली पालक

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रामपुर। मत्स्य पालक मुनाफे के लालच में लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। मछलियों को आहार के रूप में चिकन वेस्ट (अनुपयोगी मांस) खिलाया जा रहा है, जिसके हानिकारक तत्व मछलियों के जरिए लोगों के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। ऐसे में मत्स्य विभाग की ओर से मछली पालकों के लिए एडवाइजरी जारी कर चिकन वेस्ट का प्रयोग न करने की अपील की है।
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जिले में बड़े पैमाने पर मछली पालन का कारोबार होता है। यहां तक कि रामपुर के मछली पालक दूसरे जिलों तक को मछली का बीज और मछलियां पहुंचाते हैं। किंतु, मुनाफे के लालच में ये मछली पालक जाने अनजाने विभिन्न रोगों से ग्रसित और हानिकारक मछलियों का उत्पादन लेने लगे हैं। रामपुर की बात की जाए तो जिले में अधिकांश मछली पालक पंगास (प्यासी) मछली का पालन करते हैं। इस मछली के उत्पादन में कम समय लगता है और इसमें सिर्फ एक ही कांटा निकलता है। लिहाजा, लोग इस मछली को खाने में अधिक पसंद करते हैं। जिस कारण इसका बड़े पैमाने पर इस मछली को पाला जा रहा है।
किंतु, पिछले कुछ वर्षों से कुछ मछली पालकों ने थोड़े से लोभ में मछलियों को खिलाने के लिए चिकन वेस्ट का प्रयोग करने लगे हैं। जिसका प्रतिकूल असर प्रकृति और आम आदमी की सेहत पर पड़ रहा है।
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प्रकृति पर यह पड़ रहा दुष्प्रभाव
रामपुर। चिकन वेस्ट का प्रयोग करने से संबंधित तालाब में कोई भी मछली का उत्पादन दोबारा नहीं लिया जा सकता और इसी के साथ-साथ तालाब की मिट्टी और पानी की गुणवत्ता बहुत ही अधिक खराब हो जाती है, जिसको सुधारना बहुत ही मुश्किल होता है। साथ ही प्रकृति में रहने वाले जीव जंतु जो भी इस पानी को पीकर अपनी प्यास बुझाते हैं और वे भी रोगों से ग्रसित हो जाते हैं।
क्यों हानिकारक है चिकन वेस्ट
1-मुर्गी पालन में विभिन्न प्रकार के एंटीबायोटिक दवाओं का प्रयोग किया जाता है, जो कि चिकन वेस्ट में भरपूर मात्रा में होता है। ऐसे में ये एंटीबायोटिक चिकन वेस्ट के रूप में मछली और मछली के जरिए व्यक्ति के शरीर के प्रवेश कर जाते हैं, जिससे कई बीमारियों का खतरा बना रहता है।
2-चिकन वेस्ट से तैयार मछली बहुत ही जल्दी खराब होती है, क्योंकि उसके शरीर में बैक्टीरियल लोड बहुत ही ज्यादा होता है।
3-इस मछली को काटने पर इसका रंग पीला और नारंगी होता है और इसके साथ-साथ यह मछली बर्फ में लगाने के बावजूद एक दिन में खराब हो जाती है।
4-चिकन वेस्ट से तैयार मछली खाने से मनुष्य में सबसे ज्यादा शारीरिक एलर्जी, फेफड़ों एवं आंतों में संक्रमण, हृदय रोग, डायबिटीज, आर्थराइटिस जैसे वंशानुगत रोगों को बढ़ावा मिलता है।
रामपुर में बड़े पैमाने पर मछली पालन होता है। ऐसे में जानकारी हुई है कि कुछ मछली पालक चिकन वेस्ट का प्रयोग करने लगे हैं, जिससे मछली जल्द बड़ी हो और उसका उत्पादन अधिक मिले। इससे उन्हें आर्थिक लाभ होगा, लेकिन यह धारणा गलत है। इससे तालाब खराब हो जाता है। वहीं, चिकन वेस्ट के हानिकारक तत्व मछलियों के जरिए मानव शरीर में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे फेफड़ों और आंतों में संक्रमण, डायबिटीज, वंशानुगत बीमारियां आदि का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में मत्स्य पालक चिकन वेस्ट के स्थान पर दाने का ही प्रयोग करें। -अनीता, सहायक निदेशक, मत्स्य विभाग, रामपुर।
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