नामांकन के लिए कलक्ट्रेट और उसके आसपास किए गए सुरक्षा इंतजाम खासतौर पर स्कूली बच्चों और मरीजों पर आफत साबित हुए। कलक्ट्रेट जाने वाले सभी मार्गों पर जबरदस्त नाकेबंदी की गई थी। बैरीकेडिंग पर तैनात सुरक्षा कर्मियों ने न तो स्कूली बच्चों को बख्शा और न ही मरीजों को। स्कूली बसों से उतरकर बच्चों को बस्ता लादकर घर तक पैदल ही जाना पड़ा। इसके चलते अभिभावकों और आसपास के लोगों की पुलिस कर्मियों से कई दफा नोकझोंक भी हुई, लेकिन पुलिस ने इस दौरान किसी की नहीं सुनी।
शुक्रवार से विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो गई। इसके मद्देनजर सुरक्षा के कड़े इंतजाम पुलिस प्रशासन की ओर से किए गए। कलक्ट्रेट और उसके आसपास के एरिया को पूरी तरह सील कर दिया गया था। कलक्ट्रेट जाने वाले सभी मार्गों पर पुलिस, पीएसी के साथ ही सीपीएमएफ के जवानों को तैनात किया गया था। जौहर रोड को तो पुलिस ने पूरी तरह सील कर दिया गया था।
स्टार चौराहे से कलक्ट्रेट जाने वाला मार्ग पूरी तरह बंद था। इस प्वाइंट से किसी को आगे नहीं बढ़ने दिया गया। आगे बढ़ने वाले वाहनों को सूरज सिनेमा से सीआरपीएफ चुंगी से होते हुए हाईवे से गुजारा गया। इसी तरह कलक्ट्रेट के लिए रास्ता बंद किया गया था। जौहर रोड पर अस्पताल और स्कूल हैं। यहां से न तो मरीजों को गुजरने दिया गया और न ही स्कूली बच्चों को। इतना ही नहीं आवास विकास जाने वाले लोगों को भी पुलिस ने वापस लौटा दिया। जिला पंचायत रोड और अंबेडकर पार्क से सिटी की ओर आने वाले लोगों को भी पुलिस ने वापस कर दिया। इस दौरान सबसे ज्यादा दिक्कत स्कूली बच्चों को हुई। लोग खासे परेशान दिखे।
दिन भर यही स्थिति बनी रही। पुलिस कर्मी अपनी मनमानी पर उतारू थे। थाना प्रभारियों से लेकर पुलिस अफसर तक पब्लिक की सुनने को तैयार नहीं थे। कुल मिलाकर सुरक्षा के तामझाम पब्लिक के लिए बढ़ी दिक्कत बने रहे।