रामपुर। सुबह तीन से पांच बजे के बीच यात्रा के दौरान आने वाली मौत की झपकी ने तीन दिनों में दो बड़े सड़क हादसों में छह लोगों की जान ले ली। इन हादसों में किसी के सिर से पिता का साया उठ गया तो किसी ने अपनी मां को खो दिया। इसके बावजूद इस समय हाईवे पर वाहनों की आवाजाही कम होने के बावजूद जारी है।
शनिवार तड़के करीब पांच बजे दिल्ली से उत्तराखंड के रामनगर स्थित कॉर्बेट नेशनल पार्क घूमने जा रहे आईटी कंपनियों के कर्मचारियों की कार टांडा में सड़क किनारे खड़े कैंटर से पीछे से टकरा गई थी। हादसे में कंपनी के मालिक अभिषेक अग्निहोत्री, कार्तिक, नीरज और गुलबुद्दीन की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हो गए थे।
इस हादसे के पीछे भी चालक को झपकी आना प्रमुख वजह माना जा रहा है। हालांकि कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि जब हादसे से करीब एक किलोमीटर पहले पेट्रोल पंप पर चालक ने खुद स्टेपनी बदली थी तो इतनी जल्दी उसे नींद की झपकी कैसे आ गई। फिलहाल मामले की जांच जारी है।
इस हादसे में यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि दुर्घटना के समय बारिश हो रही थी। बारिश के दौरान विंडस्क्रीन पर दृश्यता प्रभावित रहती है और सड़क पर पानी भरा होने से सड़क किनारे खड़ा कैंटर दिखाई नहीं देने की भी आशंका जताई जा रही है। हादसे में एक ही कंपनी के कर्मचारी दो गाड़ियों से यात्रा कर रहे थे।
इसी तरह सोमवार तड़के मिलक में हुए हादसे में एक ही परिवार के पति-पत्नी और तीन बच्चे स्कूटी व बाइक से यात्रा कर रहे थे। बरेली के इज्जतनगर निवासी ठेकेदार कपिल खंडेलवाल की पत्नी तृप्ति गुप्ता (50) की स्कूटी तड़के करीब चार बजे डिवाइडर से टकरा गई। हादसे में तृप्ति और उनकी बेटी श्री की मौत हो गई। इस दुर्घटना में स्कूटी किसी अन्य वाहन से नहीं टकराई, बल्कि चालक के नियंत्रण खोने के बाद डिवाइडर से भिड़ गई।
पुलिस अधीक्षक सोमेंद्र राणा के अनुसार, इस घटना में भी प्रथमदृष्टया चालक महिला को नींद की झपकी आना ही दुर्घटना का कारण माना जा रहा है। हादसा भी सुबह करीब चार बजे हुआ, जिसे चिकित्सकों के अनुसार शरीर में रासायनिक बदलाव और तेज नींद आने का समय माना जाता है। ऐसे समय पलक झपकते ही गंभीर दुर्घटना हो सकती है।