मुस्लिम बहुल क्षेत्र रामपुर में भले ही भाजपा को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा हो, लेकिन भाजपा का जनाधार बढ़ा है। 2017 के विधानसभा चुनाव और 2019 के विधानसभा उपचुनाव के मुकाबले भाजपा को अधिक वोट मिले हैं। इस बार भाजपा को 76084 से अधिक वोट हासिल हुए हैं, जो शहर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा का अब तक का सबसे बेहतर प्रदर्शन है। हालांकि, इसकी वजह क्या है, यह कहना तो मुश्किल है, लेकिन कुछ जानकार मानते हैं कि इस बार भाजपा मुस्लिम महिलाओं का वोट कुछ हद तक लेने में कामयाब रही है।
रामपुर विधानसभा क्षेत्र मुस्लिम बहुल है। यही वजह है जो भाजपा के लिए रामपुर विधानसभा सीट पर आजादी के बाद से अब तक एक बार भी जीत दर्ज करने में नाकाम रही है। लेकिन, बीते कुछ चुनावों की बात करें, तो भले ही भाजपा को रामपुर विधानसभा सीट से हार का सामना करना पड़ा हो, किंतु भाजपा के जनाधार में इजाफा हुआ है। वर्ष 2017 में के विधानसभा चुनाव में भाजपा दूसरे नंबर पर रही थी लेकिन, तब भी सपा सांसद आजम खां को मिले वोटों के मुकाबले भाजपा को काफी कम वोट मिले थे। तब आजम खां को 102100 वोट मिले थे, जबकि भाजपा के शिव बहादुर सक्सेना को 55258 मत प्राप्त हुए थे। बदलाव का सिलसिला 2019 में हुए उपचुनाव से शुरु हुआ, जब आजम खां के सांसद बनने के बाद उन्होंने विधायकी से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उपचुनाव हुए, जिसमें आजम खां ने अपनी पत्नी डॉ. तजीन फात्मा को चुनाव मैदान में उतारा। यह चुनाव भी उन्होंने सपा के टिकट पर ही लड़ा था। इसमें डॉ. तजीन फात्मा को 79043 वोट मिले थे, जबकि भाजपा को 71327 वोट मिले थे। वहीं, इस बार की बात की जाए तो भाजपा के आकाश सक्सेना को 76084 वोट मिले हैं। हालांकि, आजम खां को मिले वोटों के मुकाबले यह काफी कम है।लेकिन, पिछले चुनावों की तुलना में भाजपा के वोट बढ़े हैं।