शाहबाद। सैफनी थाना क्षेत्र के दिव्या नगला गांव निवासी प्रसूता ऊषा (33) की शाहबाद में एक झोलाछाप की कथित लापरवाही से मौत हो गई। आरोप है कि गलत तरीके से नॉर्मल डिलीवरी कराने की कोशिश में पहले नवजात की मौत हुई, इसके बाद प्रसूता की हालत बिगड़ती गई और इलाज के दौरान उसने भी दम तोड़ दिया। इस संबंध में थाने में तहरीर दी गई है।
दिव्या नगला गांव निवासी राम सिंह की पत्नी ऊषा को 18 मार्च को प्रसव पीड़ा शुरू हुई थी। परिजनों के अनुसार राम सिंह दिल्ली में काम करते हैं। उनकी गैरमौजूदगी में परिवार के लोग प्रसूता को शाहबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के पास स्थित एक झोलाछाप के पास ले गए।
आरोप है कि डॉक्टर ने नॉर्मल डिलीवरी का भरोसा देकर इलाज शुरू किया लेकिन लापरवाही के कारण प्रसव के दौरान नवजात की मौत हो गई और प्रसूता की हालत गंभीर होती चली गई। परिजनों का आरोप है कि स्थिति इतनी बिगड़ गई कि प्रसूता का गर्भाशय बाहर आ गया।
हालत बिगड़ने पर महिला को रामपुर के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां से मुरादाबाद रेफर कर दिया गया। मुरादाबाद में करीब पांच दिन इलाज चला लेकिन सुधार न होने पर परिजन उसे दिल्ली ले जा रहे थे। मंगलवार शाम रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में कोहराम मचा है। मृतका अपने पीछे दो बेटे राज (10) और लव (8) को छोड़ गई है।
मामले में परिजनों ने सैफनी थाने में आरोपी झोलाछाप के खिलाफ तहरीर दी है। कोतवाल प्रदीप कुमार ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर जांच शुरू कर दी गई है।
वर्जन
महिला और नवजात की झोलाछाप के कारण मौत की सूचना नहीं है, लेकिन जहां यह घटना हुई है, वहां जांच कर कार्रवाई की जाएगी। –डॉक्टर देवेश चौधरी, नोडल अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग
-
महिला की मौत के बाद क्लीनिक बंद, बोर्ड पर कराई पुताई
शाहबाद। महिला की मौत के बाद आरोपी झोलाछाप ने अपनी अवैध क्लीनिक का शटर गिरा दिया। मोहल्ले के लोगों के अनुसार, बुधवार सुबह क्लीनिक के बाहर लगे बोर्ड लिखे नाम की रंगाई-पुताई कराई गई और झोलाछाप वहां से चली गई। संवाद
आशा वर्करों की भूमिका पर सवाल
शाहबाद। क्षेत्र में नवजात और प्रसूताओं की लगातार हो रही मौतों को लेकर आशा वर्करों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का आरोप है कि झोलाछापों के इलाज से कई जानें जा चुकी हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। संवाद