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Azam Khan: कोर्ट ने की कड़ी टिप्पणी.. सहानुभूति के हकदार नहीं आजम खां, गलत काम करने की उम्मीद नहीं की जा सकती

Sun, 24 Dec 2023 02:07 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर

सार

दो जन्म प्रमाणपत्र केस में सजा मिलने के खिलाफ आजम खां ने इसकी अपील ऊपरी अदालत में की थी। इसकी सुनवाई करते हुए कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे लोगों से गलत काम करने की उम्मीद नहीं की जा सकती। इसलिए निचली अदालत का फैसला बरकरार रहेगा। 
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आजम खां की याचिका खारिज - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बेटे के दो जन्म प्रमाणपत्र मामले में आजम खां, अब्दुल्ला और उनकी पत्नी तजीन फात्मा को सात-सात साल की सजा सुनाई गई है। इसके बाद तीनों अलग-अलग जेल में बंद हैं। सजा के खिलाफ आजम खां ने सेशन कोर्ट में अपील की थी। इसकी सुनवाई करते हुए कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है।

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कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि सपा नेता आजम खां नौ बार के विधायक और प्रदेश सरकार में मंत्री रहे हैं। अब्दुल्ला आजम भी विधायक और डाॅ. तजीन फात्मा प्रोफेसर और राज्यसभा की सदस्य रही हैं। ऐसे लोगों से गलत काम करने की उम्मीद नहीं की जा सकती। इसलिए निचली अदालत का फैसला बरकरार रहेगा। 

बेटे अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाणपत्र का मामला भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने गंज थाने में 2019 में दर्ज कराया था। इस मामले में सपा नेता आजम खां, उनकी पत्नी तजीन फात्मा व अब्दुल्ला आजम को आरोपी बनाया गया था। इस मामले में एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट ट्रायल कोर्ट ने 18 अक्तूबर को तीनों को सात-सात साल की कैद सजा सुनाई थी।
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साथ ही 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया था कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सपा नेता आजम खां ने सेशन कोर्ट में अपील दायर की थी, जिस पर शनिवार को एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। जज डॉ. विजय कुमार ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए तीनों की अपील खारिज कर दी।

 

 

अभियोजन का तर्क

जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी अमित सक्सेना ने कोर्ट में कहा कि निचली अदालत का फैसला विधि सम्मत है। निचली अदालत में मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्य के आधार पर फैसला सुनाया है। लिहाजा तीनों की अपील को खारिज किया जाए।

बचाव पक्ष का तर्क

निचली अदालत ने फैसले में त्रुटि की है। फैसला विधि सम्मत नहीं है। शिकायतकर्ता एक राजनीतिक व्यक्ति हैं। उनका कोई अधिकार शिकायत करने का नहीं है। उनके द्वारा राजनीतिक कारणों से शिकायत की गई है। जन्म प्रमाणपत्र के किसी भी मामले में एक विशेष कानून व मृत्यु पंजीकरण अधिनियम एवं उत्तर प्रदेश जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण नियमावली लागू होते हैं। दंड संहिता के प्रावधान लागू नहीं होते हैं और पत्रावली पर भी साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं।

दो माह बाद फिर आमने सामने आए आजम-आकाश

दो माह बाद शनिवार को कोर्ट रूम में सपा नेता आजम खां और उनके विरोधी भाजपा विधायक आकाश सक्सेना आमने आ गए। करीब डेढ़ घंटे तक दोनों एक ही कोर्ट रूम में रहे।

कोर्ट का फैसला स्वागत योग्य

कोर्ट ने जो फैसला दिया है, वह स्वागत योग्य है। हमें न्यायपालिका से न्याय मिलने का पूरा भरोसा था। - आकाश सक्सेना, विधायक

अभियोजन की टीम में ये रहे शामिल

अभियोजन की टीम में डीजीसी अमित सक्सेना, अपर महाधिवक्ता अनिल प्रताप सिंह, वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी अमरनाथ तिवारी, विधायक के निजी अधिवक्ता संदीप सक्सेना और वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी एसपी पांडे शामिल रहे।
 
 

आजम की अपील पर 40 पेज में आया फैसला

सेशन कोर्ट ने आजम परिवार की याचिका खारिज करते हुए 40 पेज में फैसला सुनाया। कोर्ट ने 37 दिन के भीतर अपील पर अपना फैसला सुना दिया। 18 अक्तूबर को निचली अदालत ने आजम खां, अब्दुल्ला आजम, डाॅ. तजीन फात्मा को सात-सात की कैद की सजा सुनाई थी। तीनों के अधिवक्ताओं की ओर से इस फैसले के खिलाफ 16 नवंबर को सेशन कोर्ट में अपील दायर की गई थी, जिसके बाद शनिवार को कोर्ट ने फैसला सुनाया। 21 दिसंबर को बहस पूरी हो गई थी।

आजम परिवार के लिए हाईकोर्ट का खुला विकल्प

सेशन कोर्ट से अपील खारिज होने के बाद सपा नेता आजम खां व उनके परिवार के सामने अब हाईकोर्ट में अपील दायर करने का विकल्प खुला है।

सपाइयों को खदेड़ा

 
सपा नेता आजम खां से मिलने की कोशिश में लगे सपाइयों को पुलिस ने कलक्ट्रेट व जौहर रोड स्थित गेट से खदेड़ दिया। इसको लेकर कई बार हंगामे की स्थिति भी पैदा हो गई।
 
 
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दो जन्म प्रमाणपत्र मामले में गई थी अब्दुल्ला की विधायकी

दो जन्म प्रमाणपत्र के मामले में ही अब्दुल्ला आजम की विधायकी चली गई थी। उनके निकटतम प्रतिद्धंदी रहे नवेद मियां ने उनके निर्वाचन को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। कहा था कि अब्दुल्ला नामांकन दाखिल करते समय न्यूनतम आयु की शर्त को पूरा नहीं करते थे। हाईकोर्ट ने 16 दिसंबर 2019 को अब्दुल्ला की विधायकी निरस्त कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के आदेश को बहाल रखा था।

एक लखनऊ तो दूसरा रामपुर से बना प्रमाणपत्र

अब्दुल्ला आजम का एक जन्म प्रमाणपत्र लखनऊ से बना जबकि दूसरा रामपुर नगर पालिका की ओर से जारी किया गया था। पुलिस की चार्जशीट के अनुसार रामपुर नगर पालिका से जारी प्रमाणपत्र में अब्दुल्ला की जन्मतिथि एक जनवरी 1993 दर्ज है, जबकि लखनऊ से जारी प्रमाण पत्र में उनकी जन्मतिथि 30 सितंबर 1990 है।
 
 
 
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