रामपुर। गोवंशीय पशुओं के अवशेष धर्म स्थल में फेंकने के आरोपियों को कोर्ट से राहत नहीं मिली है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने आरोपियों की जमानत खारिज कर दी है।
भोट थाना क्षेत्र के कोयली गांव में 16, 17 फरवरी की रात में गांव के एक धर्म स्थल पर असमाजिक तत्वों ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से गोवंशीय पशुओं के अवशेष डाल दिए थे। जिससे गांव में तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी। घटना की रिपोर्ट प्रधानपति धर्म सिंह ने भोट थाने में दर्ज कराई थी। पुलिस मामले की जांच के बाद आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जेल में बंद नाजिम, अनस, शारिक, छुन्नन कुरैशी व यासीन ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट में जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल किया। जिस पर सुनवाई बुधवार को सुनवाई हुई। अभियोजन की ओर से प्रभारी जिला शासकीय अधिवक्ता अरूण प्रकाश सक्सेना ने दलील दी कि आरोपियों का लंबा अपराधिक इतिहास है और उनके द्वारा किया गया कृत्य समाज में घृणा उत्पन्न करने के उद्देश्य से किया गया है। लिहाजा, जमानत निरस्त की जाए। जबकि, बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि घटना का कोई स्वतंत्र साक्ष्य नहीं है और एफआईआर में आरोपियों को नामजद नहीं किया गया है। लिहाजा, आरोपियों की जमानत मंजूर की जाए। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद प्रभारी जिला जज नीलू मोघा ने पांचों आरोपियों के जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिए।