रामपुर। श्री सनातन धर्म रामलीला कमेटी की ओर से श्री रामलीला महोत्सव का आयोजन किया गया। इस दौरान सातवें दिन धनुष यज्ञ, रावण-बाणासुर संवाद, धनुष भंजन और जयमाल प्रसंग का मंचन किया गया। कलाकारों ने बेहतरीन अभिनय से दर्शकों की तालियां बटोरीं। लीला के दौरान पंडाल जय श्रीराम के जयकारों से गूंजता रहा।
उत्सव पैलेस में रात करीब आठ बजे शुरू हुए मंचन में दिखाया गया कि मिथिला के राजा जनक अपनी पुत्री सीता के विवाह के लिए स्वयंवर का आयोजन करते हैं। शर्त रखी जाती है कि जो भी भगवान शिव के विशाल धनुष को तोड़ेगा, उसी के साथ सीता का विवाह होगा। देश-विदेश के अनेक राजा और वीर धनुष उठाने का प्रयास करते हैं, लेकिन सफल नहीं हो पाते। इसके बाद महर्षि विश्वामित्र की आज्ञा से श्रीराम स्वयंवर में आगे बढ़ते हैं। धनुष यज्ञ के दौरान रावण और बाणासुर के बीच संवाद होता है। दोनों अपने बल और पराक्रम का प्रदर्शन करते हुए शिव धनुष को उठाने की चुनौती पूरी करने की कोशिश करते हैं। जब कोई भी राजा शिव धनुष को उठाने में सफल नहीं होता, तब महर्षि विश्वामित्र के आदेश पर भगवान श्रीराम आगे आते हैं। वह सहजता से धनुष उठाते हैं और धनुष तोड़ देते हैं। धनुष टूटने की गूंज से स्वयंवर सभा में उपस्थित लोग चकित रह जाते हैं। धनुष टूटते ही मैदान में बैठे श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए। देर रात तक लोग श्रीराम भक्ति में डूबे रहे। इस अवसर पर अध्यक्ष सुनील कुमार गोयल सोनी, सह-अध्यक्ष हरिश्चंद्र अग्रवाल, महामंत्री वीरेंद्र कुमार गर्ग, कोषाध्यक्ष निर्भय गर्ग, ईश्वर शरण अग्रवाल, जुगेश अरोड़ा डॉ. अजय अग्रवाल, डॉ. सुमित गोयल, मनोज अग्रवाल समेत अन्य सदस्य मौजूद रहे।