दढ़ियाल/रामपुर। जिलेभर में अहोई अष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। महिलाओं ने अपनी संतान की लंबी आयु के लिए उपवास रखा। शाम को संतान की आरती उतारकर व्रत का परायण किया। सास-ससुर के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। मंदिरों में भी भीड़ लगी रही। मां गौरी की पूजा-अर्चना कर सुख समृद्धि की कामना की।
गुरुवार को अहोई अष्टमी पर अपनी संतान की लंबी आयु के लिए महिलाओं ने उपवास रखा। यह पर्व महिलाओं के लिए खास होता। काफी खुशियां लेकर पर्व आता है। शाम के समय महिलाएं तारा देखने के बाद उपवास खोलती है। मान्यता है कि सच्चे मन से उपवास रखने वाली महिलाओं की हर मनोकामना पूर्ण होती है। संतान की लंबी आयु की कामना को लेकर मनाए जाने वाले अहोई अष्टमी को सुबह से ही महिलाओं ने अहोई माला को धारण कर व्रत का संकल्प ले लिया था। परंपरा के अनुसार दोपहर के समय अपनी सास से कहानी सुनी। शाम होने पर तारे दिखाई देने के बाद अहोई माता की पूजा अर्चना की। कई स्थानों पर महिलाओं ने एकत्र होकर सार्वजनिक रूप से पूजा अर्चना भी की। संतान की आरती उतारने के बाद ज्येष्ठ परिजनों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। दीवार पर बनी अहोई माता की आकृति पर अहोई माता को मिठाइयों का भोग लगाने के बाद संतान के हाथ से पानी पीकर महिलाओं ने अपना उपवास खोला। अहोई अष्टमी को लेकर शहर के बाजारों में खूब चहल-पहल रही। बाजारों में पहुंचकर महिलाओं ने खरीदारी की। महिलाओं में भारी उत्साह देखने को मिला। मिठाइयों की दुकानों पर भी जमकर खरीदारी करते लोग नजर आए। वहीं गिफ्ट गैलरियों में भी भीड़ रही। युवा-युवतियों ने उपहार खरीदकर अपनी माताओं को भेंट कर पर्व की परंपरा कायम रखी।
वहीं,दढ़ियाल नगर सहित क्षेत्र में अहोई अष्टमी का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया । माताओं ने संतान की सलामती और दीर्घायु के लिए उपवास रखा और शाम को तारों को अर्घ्य देकर उपवास का समापन किया। सुबह से शाम तक बिना अन्न और जल ग्रहण किये माताओं ने घरों और मंदिरों में पूजा अर्चना की और संतान की सलामती और लंबी आयु के लिए देवी देवताओं से प्रार्थना की । बेटों ने भी माताओं के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त किया।