रामपुर। नवरात्र व्रत में प्रयोग किए जाने वाले कुट्टू के आटे के सेवन को लेकर भी विशेष सावधानी बरतें। पुराना व खुले में रखे कुट्टू के आटे का सेवन आपको फूड प्वाइजनिंग की चपेट में ला सकता है। कई बार फूड प्वाइजनिंग से भी अधिक हालत बिगड़ जाती है।
नवरात्र के व्रतों में उपवास आहार के लिए कुट्टू के आटे का सबसे अधिक प्रयोग होता है। उपवास रखने वाले कुट्टू के आटे की पकौड़ी, टिक्की, पराठें, कचौड़ी आदि बनाकर खाते हैं, लेकिन कुट्टू के आटे की खरीददारी से लेकर इसके सेवन करने तक विशेष सावधानी बरतने की जरुरत है। कई बार पुराने या बासी कुट्टू के आटे सेवन से खाने वाला गंभीर बीमार हो जाता है। चैत्र नवरात्र में ऐसी घटना चंदौसी के पांच लोगों की हालत बिगड़ गई थी। इससे पूर्व भी कई बार कुट्टू के आटे के सेवन से लोगों के बीमार पड़ने की घटनाएं हुई हैं। नवरात्र के प्रमुख उपवास आहार होने के कारण जिले में भी कुट्टू का आटा धड़ल्ले से बिक रहा है। ऐसे में इसके प्रयोग में आपको सावधानी बरतनी होगी। एसीएमओ डा. एमसी गर्ग कहते हैं कि काफी दिनों तक रखे रहने के बाद कुट्टू के आटे में विषैले तत्व पैदा हो जाते हैं। इस कारण पिछले साल या कई दिनों पुराने रखे हुए आटे के सेवन से अक्सर लोग फूड प्वाइजनिंग की चपेट में आ जाते हैं।