रामपुर। अठारहवी सदी में बनी रजा लाइब्रेरी की खूबसूरत इमारत की खूबसूरती बरकरार रखने की कवायद शुरू हो गई। मौसम और पानी की मार से कुछ स्थानों पर काली पड़ गई बाहरी दिवारों को बचाने केलिए पानी निकासी की विशेष व्यवस्था की जाएगी।
नवाबी दौर में 18वीं सदी में बनी नायाब हामिद मंजिल में अब विश्व प्रसिद्घ रजा लाइब्रेरी है। रखरखाव व पानी की उचित निकासी न होने की वजह से बाहरी दीवारों रंगत काली पड़ने लगी है। जमीन से तीन मीटर ऊंचाई तक का हिस्सा काफी बदरंग हो चुका है। इमारत की ऊपरी मंजिलों से पानी निकासी के लिए बनाए गए पतनाले जमीन से काफी ऊंचाई पर हैं। उनसे निकलने वाला पानी इमारत की बाहरी दीवारों को बदरंग कर रहा है। साथ ही इसकी वजह से इमारत की दीवारों की मजबूती भी कमजोर होने की आशंका भी घर कर गई है। इसके अलावा कुछ स्थानों से यह इमारत खस्ता हाल भी हो चुकी है। इमारत के मूल स्वरूप को बचाने और खूबसूरती कायम रखने को रजा लाइब्रेरी प्रबंधन ने कमर कस ली है। लाइब्रेरी के निदेशक प्रोफेसर एसएम अजीज उद्दीन हुसैन के प्रयास पर एएसआई, दिल्ली की टीम इस इमारत का दौरा भी कर चुकी है। लाइब्रेरी प्रशासन ने इस इमारत की मरम्मत के लिए संस्कृति मंत्रालय को एक करोड़ रुपये उपलब्ध कराने को प्रस्ताव भेज दिया है। लाइब्रेरी प्रशासन केअनुसार जल्द ही वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इसके तहत विशेष पतनाले बनवाए जाएंगे और पानी को इमारत से दूर छोड़ा जाएगा।