बदहाल भवनों में बैठने वाले तीन बच्चों, प्रसूताओं और स्टाफ के लिए राहत भरीखबर है। जिले में संचालित 2,491 आंगनबाड़ी केंद्रों को अब अपना भवन व छत मिलेगी।
मनरेगा, आईसीडीएस व पंचायतीराज विभाग मिलकर काम कराएंगे। एक भवन पर मनरेगा से पांच लाख और बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग से दो लाख रुपये खर्च होंगे।
पंचायतीराज विभाग प्रसाधन कक्ष व पेयजल की व्यवस्था कराएगा। पहले चरण में जिले में 35 केंद्रों के भवन निर्माण की प्रक्रिया मनरेगा ने शुरू कर दी है।
अन्य गांवों में निर्माण के लिए लेखपालों से भूमि के लिए प्रस्ताव मांगे गए हैं। जिले में 2,833 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। जिसमें अब तक मात्र 342 केंद्रों को ही अपना भवन मिल सका है।
शासन से बजट न मिलने के कारण 2,491 केंद्रों को अपना भवन नहीं मिल पा रहा है। गांवों में श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए मनरेगा से अब आंगनबाड़ी केंद्रों के भवनों के निर्माण कराने का भी निर्णय लिया गया है।
जिले में सभी 2,491 केंद्रों के भवनों के निर्माण में मनरेगा से करीब सवा अरब रुपये खर्च होंगे। जबकि आईसीडीएस की ओर से 50 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
भवनों के बनने के बाद पंचायतीराज विभाग की ओर से पेयजल और प्रसाधन कक्षों की व्यवस्था कराई जाएगी। भवनों के बन जाने से करीब तीन लाख बच्चों व प्रसूताओं को छत मिल सकेगी।
अब तक ये केंद्र दूसरे भवनों में संचालित हो रहे हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि मनरेगा, आईसीडीएस व पंचायतीराज विभाग मिलकर जिले में 2491 आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण कराएंगे।
इस साल जिले में 35 आंगनबाड़ी केंद्र के भवनों का निर्माण होगा। इसमें पांच लाख मनरेगा से खर्च किया जाएगा। दो लाख रुपये आईसीडीएस से खर्च होगा।
प्रसाधन कक्ष व पेयजल की व्यवस्था पंचायतीराज विभाग करेगा। इसी तरह बाकी केंद्रों के भवनों का निर्माण भी होगा।