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कांग्रेस को झटका, भाजपा का दामन थाम अदिति ने गरमाई सियासत

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रायबरेली। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को अपने ही गढ़ में तगड़ा झटका लगा है। वर्ष 2017 के चुनाव में सदर सीट से कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल करने वाली सदर विधायक अदिति सिंह ने बुधवार को भाजपा का दामन थामकर जिले की सियासत गरमा दी।
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काफी समय से अदिति कहने को कांग्रेस में रहीं, लेकिन वह भाजपा के साथ ही नजर आईं। भाजपा में शामिल होने के बाद अब उनको लेकर चल रही उठापठक पर विराम लग गया है।
साथ ही रायबरेली में कमल खिलाने के भाजपा के लगाए मास्टर स्ट्रोक से सियासी समीकरण भी बदल गए हैं। जिस तरह भाजपा ने अदिति को साथ लाकर विरोधी खेमे में हलचल पैदा की, उससे जाहिर है कि सदर सीट से भाजपा उनको अपना प्रत्याशी बना सकती है।
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बाहुबली विधायक रहे स्व.अखिलेश सिंह का सदर सीट पर लंबे समय तक कब्जा रहा। वह पांच बार सदर सीट से विधायक चुने गए। अपने जीवित रहते हुए उन्होंने अपनी बेटी अदिति सिंह को वर्ष 2017 में कांग्रेस की न सिर्फ सदस्यता दिलाई, बल्कि सदर सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ाया।
अखिलेश सिंह की बेटी को जनता ने हाथोंहाथ लिया और वह भारी वोटों से जीत हासिल कर विधानसभा पहुंचीं। चुनाव जीतने के कुछ समय बाद ही कांग्रेस और अदिति के बीच खटास हो पैदा हो गई। समय-समय पर यह खटास अदिति सिंह ने भाजपा के समर्थन में बयान देकर जगजाहिर भी की। इसी का
नतीजा रहा कि कांग्रेस और अदिति की दूरियां बढ़ती रहीं। अदिति हमेशा यूपी के मुख्यमंत्री के कार्यों की सराहना करती रहीं। विधानसभा चुनाव से पहले अदिति के भाजपा में शामिल होने की चर्चा जोरों से थी। बुधवार को लखनऊ में अदिति के भगवा झंडा थामते ही इस पर विराम लग गया।
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से सदर सीट से अदिति सिंह, जबकि हरचंदपुर सीट से एमएलसी दिनेश सिंह के भाई राकेश सिंह ने चुनाव जीता था। अदिति के भाजपा में शामिल होने के बाद नए सियासी समीकरण अब बनेंगे।
सदर सीट से भाजपा अदिति पर ही दांव लगाती है या फिर उन्हें अन्य किसी सीट से चुनाव लड़ाएगी। इसका ऐलान होना अभी बाकी है। अदिति के सामने विपक्षी दल कांग्रेस और सपा या फिर बसपा किसे चुनाव मैदान में उतारती है, यह वक्त बताएगा।
अदिति के इस कदम के बाद सपा और कांग्रेस किस तरह भाजपा को सियासी मात देने के लिए उम्मीदवार तलाशती है, अब यह देखने वाली बात होगी। फिलहाल चुनाव से पहले सियासी माहौल गर्म हो गया है।
पार्टी में उठ सकते हैं बगावत के सुर
अदिति सिंह को पार्टी में शामिल करके भाजपा जरूर इसे मास्टर स्ट्रोक मान रही होगी, लेकिन इससे पार्टी में ही बगावत के सुर उठ सकते हैं। दरअसल, सदर सीट से पहले से ही कई प्रत्याशी चुनाव लड़ने के लिए जोर आजमाइश कर रहे हैं।
नए सियासी समीकरण से इन उम्मीदवारों को जोर का झटका लगा है। यह प्रत्याशी नाराज होकर दल में रहते हुए दूसरे खेमे को फायदा पहुंचाने का काम कर सकते हैं। इसलिए पार्टी हाईकमान के सामने सभी को साथ लेकर चलने की चुनौती भी कम नहीं होगी। वर्ष 2017 में सदर सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने वाली भाजपा नेता अनीता श्रीवास्तव पहले ही अदिति पर कई बार निशाना साध चुकी हैं।
पहले एमएलसी और अब सदर विधायक
कांग्रेस हाईकमान ने वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में बाहुबली विधायक रहे स्व.अखिलेश सिंह की बेटी अदिति सिंह पर दांव लगाया और उन्हें पहली बार में ही सदर सीट से प्रत्याशी घोषित कर दिया। चुनाव में जीत हासिल भी हुई। इसके बाद भी अदिति ने पहले बगावती तेवर दिखाए और अब भाजपा का दामन थाम लिया। इससे पहले एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह ने भी कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामा था। अब सदर विधायक अदिति भी भाजपा में शामिल हो गईं। कांग्रेस जिलाध्यक्ष पंकज तिवारी कहते हैं कि यह एक तरह से धोखा है। पार्टी पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
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