फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोरोना से छुटी नौकरी तो फूलों की खेती से लिखी तरक्की की इबारत

विज्ञापन
विज्ञापन
शिवगढ़ (रायबरेली)। कोरोना में नौकरी चली गई तो तिलकराम मौर्य ने फूलों की खेती से तरक्की की इबारत लिख डाली। आज वह फूलों की खेती के जरिए खुद के साथ ही अपने परिवार की जीविका चला रहे हैं। कोरोना के बाद हालात में सुधार हुआ, लेकिन तिलकराम ने फिर परदेश की तरफ रुख नहीं किया। खेत में तैयार फूल रायबरेली के साथ ही लखनऊ की मंडियों में बेचकर तिलकराम पैसा कमा रहे हैं। उसका कहना है कि उसे मेहनत का अच्छा फल मिला। फूलों की खेती के जरिए उसने अच्छा मुकाम हासिल कर लिया।
विज्ञापन

शिवगढ़ ब्लॉक क्षेत्र के शिवगंज मजरे कुम्हरावां गांव निवासी तिलकराम मौर्य हरियाणा में प्राइवेट नौकरी करते थे। कोरोना की पहली लहर आते ही फैक्टरी ने मजदूरों को निकालना शुरू कर दिया। उसे भी नौकरी से निकाल दिया गया। इसके बाद वह घर चला आया, आर्थिक तंगी से जूूझने लगा, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। उसने फूल की खेती करने की ठानी। तिलकराम बताते हैं कि फूल की खेती का कार्य हमने शुरू किया।
करीब डेढ़ बीघा खेत में गेंदा और गुलाब की खेती करना शुरू किया। इसमें सबसे ज्यादा गेंदा की खेती की। इस कार्य में भाई कमलेश मौर्य, बहन शिवानी, पिता जगन्नाथ मौर्या भी लगाया। बताया कि हरियाणा में रहकर दिन रात मेहनत करते थे, लेकिन ज्यादा फायदा नहीं हो पाता था। यहां कम मेहनत करने पर अच्छा फायदा हुुआ। मौजूूदा समय में एक से सवा कुंटल गेंदा का फूल मंडी पहुंचाने का कार्य करते हैं। रायबरेली और लखनऊ मंडी में फूलों की बिक्री आसानी से हो जाती है।
विज्ञापन

अब परदेश जाने की इच्छा नहीं होती। उसे इस बात का मलाल है कि फूल की खेती करने में उसे कोई सरकारी मदद नहीं मिली। सरकारी मदद मिलती तो वह और बड़े पैमाने पर फूल की खेती करता। सरकार को चाहिए कि फूलों की खेती करने के लिए किसानों को प्रोत्साहन दें, ताकि अधिकतर किसान फूलों की खेती करके अपनी और अपने परिवार की किस्मत चमका सके। कहा कि नौकरी न मिले तो युवाओं को परेशान नहीं होना चाहिए, उन्हें खेती भी करना चाहिए। खेती आज भी नुकसान का कार्य नहीं है। बस जरूरत है कि खेती अच्छी तरीके से होनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें