रायबरेली। रमजान का महीना 25 अप्रैल से शुरू हो जाएगा, लेकिन हर बार की तरह इस साल रमजान को लेकर कोई रौनक नजर नहीं आ रही है। कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए लॉकडाउन चल रहा है, जिससे बाजार बंद हैं। लोग अपने-अपने घरों में कैद हैं। बहुत जरूरी होने पर ही पूरी सुरक्षा के साथ बाहर निकलते हैं।
लॉकडाउन के चलते रमजान को लेकर इस बार मस्जिदों में कोई तैयारियां नजर नहीं आ रही हैं। हालांकि मुस्लिम परिवारों में घरों में तैयारियां चल रही हैं। बाजार बंद हैं तो चिप्स, पापड़ आदि बनाने का काम घरों की छत पर चल रहा है। बाकी जरूरी सामान भी किराने की दुकानों से मंगाया जा रहा है।
रमजान का चांद नजर आते ही मस्जिदों में विशेष नमाज तरावीह शुरू हो जाती है। इसके लिए सैकड़ों लोगों की भीड़ जुटती है, लेकिन लॉकडाउन के चलते सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के लिए इस बार मस्जिदों में ताले पड़ गए हैं। ऐसे में तरावीह हो पाना मुमकिन नहीं है। लोग अपने घरों में ही तरावीह के साथ बाकी नमाज भी अदा करेंगे और रोजा रखने के साथ ही इबादत करेंगे।
काजी-ए-शहर सुहैल अख्तर रजा खान का कहना है कि रमजान मुबारक के खास महीने में ज्यादा से ज्यादा इबादत करें। मस्जिदों में न जाएं, बल्कि घर में रहकर ही नमाज अदा करें। कुरानपाक की तिलावत करें। तरावीह भी घर में ही पढ़ें। मुल्क की तरक्की और खुशहाली के साथ ही कोरोना के खात्मे के लिए भी दुआ करें। इस समय कोरोना से देश का हर व्यक्ति परेशान है। इसके खतरे को कम करने और रोकने के लिए लॉकडाउन लागू किया गया है। इसका ख्याल रखते हुए मुस्लिम समुदाय के लोग घरों में ही रहें। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। बहुत जरूरी हो तभी घर से बाहर निकलें और मास्क जरूर लगाएं।