शिक्षा और रोजगार को दी जाए प्राथमिकता
ऊंचाहार क्षेत्र के कोटिया चित्रा गांव निवासी सविनय प्रताप पहली बार विधानसभा चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। मतदाता बनने से वह काफी उत्साहित हैं। वह कहते हैं कि उनका मत ऐसे व्यक्ति को मिलेगा, जो क्षेत्र में युवाओं के लिए कार्य करेगा। सड़क, पानी, बिजली के साथ ही शिक्षा और रोजगार की व्यवस्था को प्राथमिकता देगा। आधुनिकता की दौड़ में इस क्षेत्र को इंजीनियरिंग कॉलेजों के साथ ही व्यावसायिक एवं एग्रीकल्चरल के क्षेत्र में शिक्षण संस्थानों की जरूरत है। इसके लिए प्रयास करने वाले को ही जनप्रतिनिधि चुना जाना चाहिए।
महिलाओं की बात
सम्मान के साथ मिले बराबरी का अधिकार
सवैया मीरा गांव की रहने वाली मंजू सिंह गृहणी हैं। उनका कहना है कि चुनाव के दौरान सभी नेता बेटियों के लिए शिक्षा, रोजगार की बात करते हैं, महिलाओं को समाज में सम्मान और उन्हें बराबरी का दर्जा दिलाने के साथ ही उनकी सुरक्षा की बात करते हैं, लेकिन धरातल पर ऐसा कुछ भी नजर नहीं आता है। चुनाव जीतने के बाद सब अपने हक के लिए बात करने लगते हैं। बेटियों और महिलाओं के लिए किया गया वादा भूल जाते हैं। ऐसा विधायक चुना जाना चाहिए, जो महिलाओं को सुरक्षा, सम्मान और बराबरी का दर्जा दिला सके। उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही रोजगार के अवसर उपलब्ध करा सके।
बुजुर्ग मतदाता
चुनावी शोर कम होने से मिली है राहत
ऊंचाहार (रायबरेली)। तहसील क्षेत्र के ईश्वरदासपुर गांव निवासी इंद्रराजेश्वर शुक्ल इंटर कॉलेज के रिटायर्ड प्रधानाचार्य हैं। वह बताते हैं कि पहले चुनाव में पैदल या साइकिल से प्रचार किया जाता था। झुंड में समर्थक गांवों में जाते थे। भोंपू से अपने प्रत्याशी का प्रचार करते थे। प्रत्याशी का गुणगान किया जाता था। इस दौरान जनता की समस्याएं सुनकर उन्हें दूर कराने का वादा करते थे। पहले के समय में प्रत्याशी अपने उसूलों और सिद्धांतों के साथ समझौता नहीं करते थे। जनता से किए गए वादे को पूरा करने का प्रयास करते थे। अब ऐसा कम ही देखने को मिलता है। समय बदलने के साथ ही चुनाव प्रचार का तरीका भी बदलता रहा है। पहले की तरह अब चुनाव प्रचार का शोर नहीं सुनाई देता है। चुनावी शोरगुल काफी कम हुआ है। पहले बाजारों में सड़क किनारे झंडियां लगी रहती थीं तो गांवों में दीवारें पोस्टरों से सजी रहती थीं, लेकिन अब इसमें भी कमी आई है। इससे जनता को राहत मिली है। पहले क्षेत्रीय नेता ही चुनाव प्रचार में जुटते थे। बाद में स्टार प्रचारक कूदने लगे और रैलियां होने लगीं। इस बार के चुनाव में काफी कुछ बदल गया है। चुनाव हो रहा है, यह तो आम जनता को पता है, लेकिन चुनाव जैसा माहौल नहीं नजर आ रहा है।