रायबरेली। स्कूल आते-जाते समय कुछ लड़के परेशान करते हैं, क्या करें। कितने रास्ते बदलें, शोहदे परेशान करना नहीं छोड़ते। घर में बताओ तो परिवार वाले चुप रहने को कहते हैं या स्कूल नहीं जाने देते। अब तो हम बताने से भी डरते हैं।
अपनी पीड़ा बताते हुए एक छात्रा फफक पड़ी तो दूसरी भी मायूस सी हो गई। अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित पुलिस की चौपाल में बच्चियों ने अपना दर्द बयां किया। चौपाल में महिला अधिकारियों ने बच्चियों का हौसला बढ़ाया तो उनका उत्साह हिलोरे मारने लगा।
जोश, जज्बे और उमंग में डूबे बच्चियों ने अधिकारियों से सवालों की झड़ी लगा दी। सवालों के जवाब से संतुष्ट होकर सभी ने कभी तालियां बजाकर तो कभी हाथ उठाकर खुशी का इजहार किया।
स्काउट भवन में शनिवार को पुलिस की चौपाल लगी। इसमें जिलेभर से आए 166 स्काउट और 120 गाइड जुटे। हर किसी के मन में कोई न कोई सवाल था, लेकिन झिझक और डर इतना कि अधिकारियों से सवाल पूछने से कतराते रहे।
करीब दो घंटे तक चली चौपाल में मिशन शक्ति की नोडल अधिकारी एवं विधि विज्ञान प्रयोगशाला (फील्ड यूनिट) की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रतिभा त्रिपाठी और यातायात प्रभारी रेखा सिंह ने स्काउट-गाइड के मन में ऐसा जोश भरा कि उनके सामने सवालों की झड़ी लग गई।
अधिकारियों ने कहा कि हर कोई अपनी सुरक्षा के प्रति सतर्क रहे और जागरूक बनें। जब कभी घिर जाएं तो घबराएं नहीं, डटकर मुकाबला करें और जोर-जोर से चिल्लाते हुए भीड़भाड़ वाले स्थान पर जाने की कोशिश करें। ऐसा करने से अपराधी पकड़े जाने के भय से भाग जाएगा।
दयाल शिक्षा निकेतन भदोखर की गाइड अमिता, हरनारायण इंटर कॉलेज ऊंचाहार की गाइड अमिता और उच्च प्राथमिक विद्यालय राजामऊ की गाइड शुभी ने पूछा कि रास्ते में परेशान करने वालों से किस तरह से बच सकते हैं। जवाब मिला कि समूह में चलें। समय और रास्ता बदलते रहें।
इसके बाद भी कोई परेशान करे तो पुलिस की मदद लें। स्काउट आदर्श अग्रहरि, विनय कुमार, सत्यम, सचिन आदि ने पूछा कि आखिर बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ की बात क्यों की जाती है। जवाब मिला कि ऐसा माहौल बनाने की कोशिश करें, जिससे बेटियों की सुरक्षा होती रहे और मिशन शक्ति, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसे अभियानों की जरूरत न पड़े।
राजामऊ की नंदिनी, सौम्या, दुर्गा इंटरमीडिएट की अनामिका, सोनाली, करिश्मा आदि ने कहा कि छात्राएं अपने घर में समस्या बताती हैं तो चुप रहने को कहा जाता है। ज्यादा परेशानी होते देख स्कूल नहीं जाने दिया जाता है। इस सवाल के जवाब में कहा गया कि चुप रहना कतई ठीक नहीं है।
हेल्पलाइन नंबरों पर शिकायत करें या हर जगह रखवाए गए पिंक बॉक्स में अपनी बात लिखकर दें। उनकी पहचान को छिपाए रखते हुए शोहदों, शरारती तत्वों पर कार्रवाई की जाएगी। स्काउट गाइड संस्था के वरिष्ठ लीडर ट्रेनर लक्ष्मीकांत शुक्ला ने कहा कि आपकी जागरूकता ही आपकी सुरक्षा है। इन पंक्तियों को अमर उजाला फाउंडेशन ने अमल में लाया है, जो उसके बैनर में भी लिखा है।
लीडर ट्रेनर शशि जायसवाल, शशि कुमार शर्मा ने भी अमर उजाला की चौपाल को समाज में बदलाव की कड़ी बताया। निर्मला देवी, श्रीराम यादव, अनीसा तनवीर, साधना शर्मा, निरुपमा वाजपेयी, शिवेंद्र सिंह, छीटूराम, हरिनाथ पांडेय, पवन मौर्य, विवेक, नीलिमा, मोहिता, भावना, जितेंद्र सिंह ने स्काउट गाइड का उत्साह बढ़ाया।
स्काउट-गाइड ने नोट किए सारे जरूरी नंबर
चौपाल में अपने सवालों के जवाब पाकर स्काउट-गाइड काफी खुश दिखे और बताए गए जरूरी हेल्पलाइन नंबरों, पुलिस के सीयूजी नंबरों की जानकारी कर उन्हें नोट किया। गाइड अमिता, संध्या, आद्या बाजपेयी और संध्या यादव ने कहा कि चौपाल के जरिए उन्हें काफी कुछ जानकारी मिली है। मन में कई तरह की शंकाएं थीं, जो अब दूर हुई हैं। अपनी सुरक्षा को लेकर हमेशा डर बना रहता था, पर अब नहीं है। स्काउट सचिन कुमार, शिवांश त्रिवेदी, विकास दीक्षित और वैभव मिश्रा ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से न सिर्फ जानकारी होती है, बल्कि झिझक भी दूर होती है।