इसकी वजह बाईपास के निर्माण के लिए भूमि न मिल पाना है। किसानों को देने के लिए प्रशासन को मुआवजे के 6.5 करोड़ रुपये भी उपलब्ध करा दिए गए। बावजूद इसके भूमि अधिग्रहण में लापरवाही की जा रही है।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण 4.24 अरब से रायबरेली-बांदा नेशनल हाईवे का निर्माण करा रहा है। मई-2016 में इस प्रोजेक्ट को पूरा होना है। लेकिन प्रशासनिक अफसरों की ढिलाई से ऐसा नहीं हो सकेगा।
जानकारों का कहना है कि सिर्फ बाईपास के निर्माण में ही एक साल का समय लग जाएगा। ऐसे में निर्धारित समय में बाईपास के बनकर तैयार होने का कोई सवाल ही नहीं है।
बाईपास न बनने से मुसाफिरों को कस्बे से होकर गुजरना पड़ता है। यातायात की अधिकता के चलते कस्बे में जाम लगता है। इससे मुसाफिरों को परेशानी झेलनी पड़ती है।
रायबरेली-बांदा हाईवे पर लालगंज और फतेहपुर दो जगह बाईपास बनने हैं। दोनों ही जगह भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया एक साथ शुरू हुई थी। फतेहपुर में बाईपास के लिए जमीन उपलब्ध हो गई।
वहां पर निर्माण कार्य भी शुरू हो गया है। लेकिन यहां एनएचएआई को अब तक भूमि ही उपलब्ध नहीं हो सकी है।एनएचएआई के पीडी सीएम द्विवेदी लालगंज में बाईपास का निर्माण भूमि उपलब्ध न होने की वजह से अटका है।
मुआवजे की धनराशि भी दे दी गई, लेकिन अब तक भूमि नहीं मिली। भूमि मिलने पर जल्द निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
वहीं एसडीएम लालगंज दिलीप कुमार एनएचएआई को बाईपास के लिए जो भूमि चाहिए, उसके दस्तावेज भूमि अध्याप्ति कार्यालय भेज दिए गए हैं। आगे की कार्रवाई भूमि अध्याप्ति कार्यालय की ओर से पूरी की जानी है।