रायबरेली। जिले के ग्रामीण अंचलों में लोगों को दूषित पानी से निजात दिलाने के लिए केंद्र सरकार की ओर शुरू की गई जल जीवन मिशन योजना की रफ्तार थम गई है। इसकी मुख्य वजह जल निगम का विभाजन है। जिस खंड को योजना का संचालन करना है कि उस खंड के पास अभी तक पर्याप्त स्टॉप नहीं है।
यही नहीं कोई दफ्तर भी नहीं खुल सका है। इस वजह से काम ठप है। 110 स्थानों पर नई पानी की टंकियों का निर्माण होना है, जिसमें में महज तीन टंकियों का निर्माण पूरा हो पाया है। जिले में 989 ग्राम पंचायतें हैं। इसकी आबादी करीब 29 लाख है। गांव के लोग हैंडपंप और कुओं का पानी पीते हैं।
पेयजल समस्या और शुद्घ पानी लोगों तक पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन योजना शुरू की है। योजना के तहत हर घर तक पाइप लाइन बिछाकर पानी की सप्लाई दी जानी है।
नए सिरे से डवलप होगा जल निगम ग्रामीण
अभी तक जल निगम के पास शहर में सीवर लाइन बिछाने के साथ ग्रामीण अंचलों में जल जीवन मिशन योजना के तहत काम कराने की जिम्मेदारी थी। लेकिन पिछले महीने जल निगम को दो भागों में बांट दिया गया। पहले से यहां तैनात एक्सईएन, सहायक अभियंता, अवर अभियंता व कर्मचारियों को जल निगम नगरीय में शामिल कर दिया गया है। जबकि जल निगम ग्रामीण में अभी तक केवल एक्सईएन और तीन अवर अभियंताओं की तैनाती हुई है। कोई कार्यालय भी नहीं खुला है। इस वजह से जल जीवन मिशन योजना का काम ठप है।
104 पुरानी पानी की टंकियों का होगा जीर्णोद्धार
वैसे तो अभी ग्रामीण अंचलों में करीब 104 ग्राम पंचायतों में पानी की टंकियां हैं। यह पानी की टंकियां तो चल रही हैं, लेकिन पाइप लाइनें ध्वस्त होने से इनसे जुड़े गांवों में पानी नहीं पहुंच रहा है। उन गांवों की पाइप लाइनों को भी दुरुस्त कराकर लोगों के घरों तक पानी पहुंचाया जाना है। पुरानी पानी की टंकियां से निकली पाइप लाइनों को दुरुस्त कराने का काम भी अधर में लटका है।
जल्द आएगी तेजी, दिए गए दिशा निर्देश
जल जीवन मिशन योजना का काम अब जल निगम ग्रामीण को कराना है। एक्सईएन मोहित विक्रम सिंह के अलावा तीन अवर अभियंताओं की तैनाती हो चुकी है। जल्द ही अन्य स्टाफ तैनात होगा। एक्सईएन को कार्यालय समेत अन्य संसाधन जुटाने के लिए निर्देशित किया गया है। योजना के तहत अब तक कितना काम हुआ। इसकी पूरी जानकारी नहीं है।
जितेश निगम, अधीक्षण अभियंता, जल निगम, लखनऊ