रायबरेली। जिले में 4000 से अधिक अवैध क्लीनिक चल रहीं हैं। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग चुप्पी साधे बैठा है। पिछले दो माह में झोलाछाप डॉक्टरों के इलाज से कई मरीजों की मौत भी हो चुकी है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है।
वहीं गर्मी बढ़ने पर संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में लोग इन झोलाछाप डॉक्टरों के पास जाकर इलाज करा रहे हैं।
जिले में झोलाछाप डॉक्टरों का मकड़जाल फैला है। इसे रोकने के लिए शासन स्तर से कई बार सीएमओ, एसीएमओ और अधीक्षकों को कार्रवाई करने के आदेश दिए गए, लेकिन कुछ नहीं हो रहा है।
बछरावां क्षेत्र में एसीएमओ ने कई अस्पताल पकड़े, लेकिन जांच के नाम पर मामलों को दबा दिया गया। अब तक किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। सतांव क्षेत्र में भी बच्ची की मौत के मामले को भी दबाने का प्रयास किया गया।
शहर में भी बिना पंजीयन के अवैध रूप से क्लीनिक चल रही हैं, लेकिन जिम्मेदार चुप्पी साधे हैं। डीह, अमावां, महराजगंज, हरचंदपुर, गदागंज, छतोह, जगतपुर, शिवगढ़ आदि क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टर लोगों की जान से खेल रहे हैं। यहां अवैध क्लीनिक पर कार्रवाई नहीं हो रही है।
लंबे समय से अवैध क्लीनिकों के खिलाफ अभियान नहीं
जिले में भले ही झोलाछाप अवैध क्लीनिक संचालित कर रहे हैं, लेकिन लंबे समय से इस कारोबार को रोकने के लिए विभाग की ओर से अभियान नहीं चलाया गया। हालांकि शासन के स्तर से इस कारोबार को रोकने के लिए कई बार दिशा-निर्देश अधिकारियों को मिले। टीमें क्षेत्रों में जाती भी हैं, लेकिन निरीक्षण के दौरान कहीं भी झोलाछाप नजर नहीं आते हैं।
जिले में अवैध रूप से संचालित क्लीनिक संचालकों पर कार्रवाई करने के साथ ही निरीक्षण करने के निर्देश नोडल अधिकारी व एसीएमओ को दिए गए हैं। शिकायत मिलने पर प्राथमिकता पर झोलाछाप के खिलाफ जांच करवाकर कार्रवाई की जाती है। जल्द ही अभियान चलाया जाएगा।
डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ