रायबरेली। विभिन्न प्रांतों में रह रहे प्रवासियों को वापस घर पहुंचाने के लिए चलाई गईं श्रमिक स्पेशल ट्रेनें शुरुआत में सही चलीं, लेकिन अब काफी विलंब से पहुंच रही हैं। सूरत से चली दो गाड़ियां यहां 13 और 14 घंटे की देरी से दूसरे पहुंची। व्यवस्था में लगे रेलवे, स्वास्थ्य, पुलिस, प्रशासन के अधिकारी और कर्मचारी पूरी रात ट्रेन के आने का इंतजार करते रहे।
सूरत से चली दोनों श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में एक गाड़ी बुधवार शाम 4.45 बजे और दूसरी गाड़ी रात 7.45 बजे आनी थी। इन दोनों ही ट्रेनों के लेट होने पर मध्य रात्रि तक आने की संभावना जताई जा रही थी, जिससे पूरा अमला पूरी रात रेलवे स्टेशन पर डटा रहा। स्टेशन के बाहर भी रोडवेज बसों की लाइन लगी रही। पुलिस कर्मियों के साथ स्वास्थ्य विभाग की टीम भी एंबुलेंस तथा अन्य व्यवस्थाओं के साथ मुस्तैद रही। लेकिन दोनों गाड़ियां अगले दिन गुरुवार को पहुंची।
गुरुवार को सुबह 5.35 बजे सूरत से 24 बोगियों वाली श्रमिक स्पेशल यहां पहुंची, जो 13 घंटे लेट रही। इस गाड़ी से 723 प्रवासी उतारे गए, जिनकी थर्मल स्क्रीनिंग कराई गई और फिर 25 रोडवेज बसों से उनके गृह जनपद भेजा गया। सूरत से ही 24 बोगियों वाली दूसरी गाड़ी 14 घंटे की देरी से सुबह 9.38 बजे पहुंची, जिसमें सवार 1401 प्रवासियों को 45 रोडवेज बसों से भेजा गया।
गुरुवार को भी चार ट्रेनों के आने का शेड्यूल तय था, लेकिन इनमें से सिर्फ एक गाड़ी सुबह 7.35 बजे जालंधर से आई। 24 कोच वाली इस गाड़ी में भी 1052 प्रवासी सवार थे। इन प्रवासियों को उनके गृह जनपद ले जाने के लिए 38 रोडवेज बसें लगाई गई। बाकी सूरत, अहमदाबाद, गोआ मडग़ांव से आने वाली तीन ट्रेनों का इंतजार किया जा रहा था।
रोडवेज के यातायात अधीक्षक अशोक कुमार त्रिपाठी ने बताया कि ट्रेनों की लेटलतीफी के चलते पूरी रात इंतजार करना पड़ा। प्रवासियों को ले जाने के लिए पर्याप्त बसें जीआईसी ग्राउंड में खड़ी करा दी गई थीं। थानाध्यक्ष जीआरपी रविंद्र कुमार पांडेय का कहना है कि 24 घंटे स्टेशन परिसर सुरक्षा घेरे में रहता है, ताकि कोई अव्यवस्था न होने पाए।
रेलवे के स्टेशन अधीक्षक राकेश कुमार ने बताया कि श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के आने का सिलसिला अभी इसी तरह चलता रहेगा। ट्रेन के आने का संकेत मिलते ही व्यवस्ता को चुस्त-दुरुस्त कर लिया जाता है। ट्रेनों से आ रहे यात्रियों की सुविधाओं का भी पूरा ख्याल रखा जा रहा है।