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10 दिन में जवाब नहीं दिया तो दर्ज होगा 39 दवा कंपनियों पर केस

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रायबरेली। मामा चौराहे के पास कूड़े में दवा फेंकने के मामले में अब सख्त कार्रवाई करने की तैयारी है। 10 दिन के भीतर जवाब न मिलने पर 39 कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
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नोटिस देकर सभी से जवाब तलब किया गया है। अब तक की जांच में बड़े थोक दुकानदारों पर ही कूड़े में दवा फेंकने व जलाने का अंदेशा जताया जा रहा है।
अमर उजाला की ओर से मामले का खुलासा किए जाने के बाद से दवा कारोबारियों में हड़कंप मचा है। नगर पालिका के कूड़े में पांच लाख कीमत की दवाएं जला दिए जाने के मामले से हड़कंप मचा है।
मामला उजागर होने के बाद सिर्फ रायबरेली नहीं, बल्कि लखनऊ में बैठे विभागीय अधिकारी सकते में हैं। सात लाख की दवाएं कूड़े से बरामद हुई हैं, जबकि पांच लाख से ज्यादा की दवाएं जला दी गई।
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बरामद की दवाएं 39 कंपनियों की पाई गई थी। इस पर एफएसडीए के अधिकारियों की ओर से सभी कंपनियों के अधिकारियों को नोटिस देकर जवाब मांगा है कि उन्होंने कहां-कहां पर दवाओं की आपूर्ति की थी। यह जानकारी उपलब्ध होने के बाद स्टॉक चेक कराया जाएगा।
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी इंद्र बहादुर यादव का कहना है कि 10 दिन के अंदर जवाब न देने पर दवा कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
जिस तरह लाखों रुपये की दवाएं कूड़े में फेंकी गई, उससे आशंका है कि इस खेल में बड़े दवा कारोबारियों का ही हाथ है। सभी को चिह्नित करने का काम भी कराया जा रहा है।
कोरोना काल में बड़े पैमाने पर खरीदी गईं दवाएं
कहा जा रहा है कि जिले के कुछ ऐसे कारोबारी हैं, जिन्होंने कोरोना काल में बड़े पैमाने पर दवा की खरीद की थी। इसमें मधुबन रोड पर संचालित एक थोक कारोबारी का नाम भी सामने आ रहा है, जिसने कोरोना काल के दो साल मे बड़ी मात्रा में दवा की खरीद-फरोख्त की।
यही नहीं एम्स स्थित संचालित मेडिकल स्टोरों पर भी दवा की सप्लाई करने वाले एक कारोबारी का भी नाम सामने आ रहा है। पहले यह कारोबारी कुछ चिकित्सकों के नर्सिंग होमों में रहकर दवा की आपूर्ति करता था। इन दिनों यह कारोबारी एम्स स्थित मेडिकल स्टोरों पर बड़े पैमाने पर दवा की सप्लाई कर रहा है।
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