रायबरेली। उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स व मिड डे मील वर्कर्स यूनियन ने अपनी मांगों को लेकर मंगलवार को हड़ताल के समर्थन में विकास भवन में धरने के बाद कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया। आशा वर्कर्स यूनियन की जिलाध्यक्ष गीता मिश्रा ने कहा कि सरकार कुछ सुनना नहीं चाहती। दिल्ली व हरियाणा मे आंदोलित आशा व आंगनबाड़ी कर्मियों की बात सुनने के बजाय एस्मा जैसे काले कानून का इस्तेमाल किया।
प्रदर्शन में शहर अध्यक्ष शीला श्रीवास्तव ने कहा कि पूरा एनएचएम आकंठ भ्रष्टाचार में डूबा हुआ है। काम करने वाली आशाओं को भुगतान में मनमानी की जा रही है। प्रदेश सह सचिव सरला श्रीवास्तव ने कहा कि न्यूनतम वेतन व राज्य कार्मचारी की श्रेणी में समायोजन की मांग सरकार ज्यादा दिन टाल नहीं सकती। इसके लिए एक बड़ी एकता के साथ सरकार को बाध्य करना होगा। मिड डे मील वर्कर्स यूनियन नेता कृष्ण आत्मा शर्मा ने कहा कि सरकार को शर्म भी नहीं आती कि 1500 रुपये मासिक मानदेय पाने वाली रसोइयां बहनों को आठ माह से मानदेय नहीं दिया गया।
सरकार मध्यान्ह भोजन योजना को भी बड़ी कंपनियों को ठेके पर देने की तैयारी में है। जिला सचिव सावित्री व सह सचिव प्रीति, स्नेहलता ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में किसान नेता फूलचंद्र मौर्य, टीपू सुल्तान ने मांगों का समर्थन किया। अध्यक्षता उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन की प्रदेश उपाध्यक्ष अनीता मिश्रा ने की। बाद में सभी जुलूस में नारे लगाते हुए कलेक्ट्रेट स्थित डीएम कार्यालय के सामने पहुंचकर प्रदर्शन करने के बाद ज्ञापन सौंपा।