रायबरेली। सरकारी एंबुलेंस को स्वास्थ्य सुविधाओं से लैस होने का दावा किया जाता है, लेकिन यह दावा मंगलवार को खोखला साबित हुआ। शहर के मनिका रोड पर दो श्रमिक सीवर मैनहोल में सफाई करने के लिए नीचे उतरे थे। जहरीली गैस के कारण उनकी हालत बिगड़ गई। सूचना पर एक एबुलेंस पहुंची, लेकिन उस एंबुलेंस में आक्सीजन किट मौजूद नहीं थी। ऐेसे में बाहर निकाले गए एक श्रमिक को दूसरी एंबुलेंस बुलाकर जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
मौजूद लोगों का कहना था कि यदि पहले आई एंबुलेंस में आक्सीजन किट होती तो एक श्रमिक की जान बच जाती। उधर, सीएमओ डॉ.वीरेंद्र सिंह का कहना है कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है। यदि ऐसा हुआ तो इसकी जांच कराई जाएगी। मालूम रहे कि करीब एक साल पहले इंदिरा नगर की सभासद पूनम तिवारी ने सेफ्टी उपकरण के साथ ही सीवर मैनहोल में सफाई कार्य कराए जाने का मुद्दा उठाया था।
इसका एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें सफाई कर्मी बिना सेफ्टी उपकरण के सफाई कार्य कर रहे थे। वीडियो को संज्ञान लेते हुुए बिना सेफ्टी उपकरण के सफाई कार्य पर रोक लगा दी गई थी। कुछ दिन बाद भी मनमाने ढंग से सफाई का काम शुरू करा दिया गया। सभासद का कहना है कि मामले में सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
ऊंचाहार विधायक एवं पूर्व मंत्री डॉ.मनोज कुमार पांडेय के भाई सपा नेता डॉ. अमिताभ पांडेय ने सीवर मैनहोल में सफाई के दौरान दो श्रमिकों की मौैत पर गहरी नाराजगी जताई है। घटना की सूचना मिलने पर जिला अस्पताल पहुंचकर उन्होंने सदर कोतवाल राघवन कुमार सिंह से मामले में सख्त कार्रवाई किए जाने की मांग की। साथ ही श्रमिकों के परिवारीजनों को 50-50 लाख रुपये और सरकारी नौकरी दिलाए जाने की मांग की।
उन्होंने बताया कि ऊंचाहार विधायक ने कार्यदायी संस्था के खिलाफ उत्तर प्रदेश विधान सभा याचिका समिति में भी यह प्रश्न उठाया था कि अमृत योजना में मनमाने ढंग से कार्य कराया जा रहा है। बावजूद इसके कार्यदायी संस्था ने ध्यान नहीं दिया। साथ ही कार्यदायी संस्था को ब्लैक लिस्ट किया जाए। जिला अस्पताल के बाद उन्होंने मौके पर पहुंचकर नागरिकों से मिलकर घटना की जानकारी ली।
भारत सेवक समाज के जिलाध्यक्ष शिव नारायण सोनी ने भी दो श्रमिकों की मौत पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा है कि कार्यदायी संस्था की ओर से मनमाने ढंग से काम किया गया। आज तक काम पूरा नहीं हो पाया। सीवर कनेक्शन तक देने में लापरवाही बरती जा रही है। इसकी जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। श्रमिकों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।