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सीएचसी-पीएचसी में नहीं हो रहे ऑपरेशन से प्रसव

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रायबरेली में सोमवार को खीरों सीएचसी में बंद ऑपरेशन थिएटर।संवाद - फोटो : RAIBARAILY
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केस-1
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नाम एफआरयू, प्रसूता ने अस्पताल के बाहर जना बच्चा
बछरावां (रायबरेली)। फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) होने के बाद भी बछरावां सीएचसी में प्रसव के दौरान ऑपरेशन की सुविधा नहीं है। 22 अक्तूबर को खालेगांव मजरे शेषपुर समोधा निवासी औसान की पत्नी सोनी का प्रसव मात्र इसलिए नहीं हो सका, क्योंकि गंभीर केस के इलाज के लिए बंदोबस्त नहीं था। ऑपरेशन की सुविधा न होने के कारण महिला चिकित्सक डॉ. नमृता सिंह प्रसूता को देखने के बाद कहीं चली गईं थी। उसे जिल अस्पताल रेफर कर दिया गया था। हालांकि यह दीगर बात है कि अस्पताल से 100 मीटर की दूरी पर सामान्य प्रसव हो गया था। अब जच्चा-बच्चा स्वस्थ हैं।
केस-2
सीएचसी से रेफर किया महिला अस्पताल, एंबुलेंस में प्रसव
खीरों (रायबरेली)। 10 नवंबर को गुरुबख्शगंज थाना क्षेत्र के बथुआ खास गांव की रहने वाली प्रसूता को सीएचसी ले जाया गया। मामला गंभीर होने के कारण उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। महिला अस्पताल में भी डॉक्टरों और स्टाफ ने रिस्क न उठाकर हालत नाजुक बताकर लखनऊ रेफर कर दिया। हालांकि जिला अस्पताल पहुंचने में प्रसूता की हालत काफी बिगड़ गई थी। इसी कारण कोई हाथ लगाने का तैयार नहीं था। एंबुलेंस से प्रसूता को लखनऊ ले जाया जा रहा था। शहर के रतापुर चौराहा पर प्रसूता ने एंबुलेंस नवजात को जन्म दे दिया। प्रसव के बाद प्रसूता और नवजात बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।
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रायबरेली। ये उदाहरण तो नमूने मात्र हैं। हर रोज प्रसूताओं को सरकारी अस्पतालों में प्रसव के दौरान बेहाल होना पड़ रहा है। कहीं डॉक्टर नहीं तो कहीं ऑपरेशन थिएटर (ओटी) में संसाधनों के अभाव के कारण जिले की किसी भी सीएचसी में सिजेरियन प्रसव नहीं हो रहा है। जच्चा-बच्चा मृत्युदर को कम करने के लिए भले ही ढिंढोरा पीटा जा रहा है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसूताओं को चिकित्सीय सुविधाएं देने के नाम पर सिर्फ औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं। सामान्य प्रसव करवाने में असफल होने पर प्रसूताओं को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जा रहा है। ऐेसे में प्रसूताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बछरावां, लालगंज और ऊंचाहार को एफआरयू का दर्जा मिल चुका है, लेकिन यहां भी सिजेरियन प्रसव की सुविधा विभाग नहीं दे पा रहा है। जिला महिला अस्पताल में पिछले अप्रैल माह से अब तक 1512 सिजेरियन प्रसव कराए गए हैं। अब तक जिले में 21,235 सामान्य प्रसव हुए हैं। जिले की लालगंज सीएचसी में प्रसव की सुविधा शुरू करवाने के लिए कवायद शुरू की गई है।
तीन साल पहले एफआरयू में शुरू हुए थे सिजेरियन प्रसव
रायबरेली। जिले की फर्स्ट रेफरल इकाइयों बछरावां, लालगंज, और ऊंचाहार के अलावा डलमऊ, सलोन अदि सीएचसी में सिजेरियन प्रसव शुरू कराए गए थे, लेकिन धीरे-धीरे संसाधनों के अभाव में ऑपरेशन होने बंद हो गए। खासकर पिछले दो साल में कोरोना के कहर के कारण ये सेवाएं पूरी तरह से ठप हो चुकी हैं। एफआरयू में यह सुविधा होने के कारण प्रसूताओं को जिला महिला अस्पताल में आकर परेशान नहीं होना पड़ता था।
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एक माह में जिले में हुए सामान्य प्रसव
अस्पताल माह में सामान्य प्रसव
अमावां 113
बछरावां 328
बेलाभेला 179
डलमऊ 212
गौरा 127
डीह 196
हरचंदपुर 161
जगतपुर 147
जतुआटप्पा 111
खीरों 161
लालगंज 204
महराजगंज 212
नसीराबाद 196
सलोन 351
सरेनी 149
शिवगढ़ 170
ऊंचाहार 276
महिला अस्पताल 869
कुल 4161
सभी एफआरयू में सिजेरियन प्रसव कराने का प्रयास किया जा रहा है। लालगंज सीएचसी में डॉक्टरों की समुचित व्यवस्था की जा चुकी है। जल्द ही सिजेरियन प्रसव शुरू कराए जाएंगे। सिजेरियन प्रसव में ब्लड की जरूरत होती है। ग्रामीण स्तर पर ब्लड न मिल पाने के कारण समस्या आती है। सामान्य प्रसव सभी सेंटरों पर आसानी से कराए जा रहे हैं। -डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ
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