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300 किसानों का धान खरीद का चार करोड़ का भुगतान बकाया

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रायबरेली। किसी को पिपरमेंट की खेती तो किसी को बच्चों का स्कूल में दाखिला कराने के लिए पैसे की जरूरत है। खेती से ही इनकी दो वक्त की रोटी का जुगाड़ होता है।
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धान की बिक्री करने वाले करीब 300 किसानों का चार करोड़ रुपये बकाया है। भुगतान के लिए किसान अधिकारियों की चौखट घिसने को मजबूर हैं, लेकिन कोई उनकी सुनने वाला नहीं है। परेशान किसानों में अधिकारियों के प्रति आक्रोश है।
जिले में इस बार एक लाख 75 हजार मीट्रिक टन धान की खरीद हुई है। धान बेचने के लिए भी किसानों को परेशानी झेलनी पड़ी थी।
धान खरीद बंद होने के बाद भी किसानों की मुसीबत कम नहीं हुई। अब सैकड़ों किसान धान बेचने के बाद भुगतान के लिए दौड़भाग कर रहे हैं। कभी किसान खाद्य एवं रसद विभाग के कार्यालय तो कभी संबंधित एजेंसी के दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं।
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क्या करूं, कोई नहीं सुनता हमारी पीड़ा
गदागंज-डीह। दीनशाहगौरा ब्लॉक क्षेत्र के बांसी रिहायक पूरे बरवन गांव के किसान चंद्रशेखर अग्निहोत्री, कुरौली बुधकर गांव के किसान हरीशंकर वर्मा कहते हैं कि दो माह बीत गए हैं, लेकिन भुगतान नहीं हो पाया है।
धान पहले ही बेच दिया था। पैसा न मिलने के कारण पिपरमेंट की फसल की बोआई का काम नहीं हो पा रहा है। अधिकारियों के पास जाओ तो आजकल का आश्वासन देकर वापस कर देते हैं।
स्कूल में बच्चों का दाखिला कराने तक का पैसा नहीं है। डीह क्षेत्र के किसान बैजनाथ का कहना है कि धान तो किसी तरह खरीद लिया मगर भुगतान आज तक नहीं हो पाया। जल्द भुगतान नहीं हुआ तो पिपरमिंट की फसल की बोआई नहीं कर पाएंगे।
करीब 300 किसानों का धान खरीद का चार करोड़ रुपये बकाया है। पीसीएफ समेत दो एजेंसियों से किसानों का बकाया भुगतान कराने के लिए कहा गया है। साफ्टवेयर में दिक्कत होने के कारण दिक्कत आ रही है। फिलहाल जल्द भुगतान करा दिया जाएगा। किसानों को परेशान कतई नहीं होने दिया जाएगा।
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- रामानंद जायसवाल, डिप्टी आरएमओ
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