रायबरेली। मामा चौराहे के पास कूड़े में पड़ी पांच लाख कीमत की दवाएं जला देने के मामले की जांच बुधवार को शुरू हो गई। अमर उजाला में छपी खबर का संज्ञान लेते हुए एफएसडीए के अधिकारी मौके पर पहुंचे और पड़ताल की। इस दौरान वहां पर भारी मात्रा में जीवन रक्षक दवाएं, इंजेक्शन और ग्लूकोज पड़े मिले।
करीब 50 बोरियों में बची दवाओं को भरा गया। जबकि भारी मात्रा में दवाओं को जलाया जा चुका था। दवाओं को किसने और क्यों फेंका, इसका जवाब विभागीय अधिकारियों के पास नहीं है। हालांकि यह जानने के लिए अब अधिकारी मेडिकल स्टोरों और थोक विक्रेताओं की दुकानों का स्टॉक चेक करेंगे।
मामा चौराहे के पास नगर पालिका के कूड़े में पांच लाख कीमत की दवाओं को फेंककर जला दिया गया था। अमर उजाला में खबर छपी तो विभागीय अधिकारियों की नींद खुली।
आननफानन बुधवार सुबह एफएसडीए के मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी इंद्र बहादुर यादव, औषधि निरीक्षक शिवेंद्र सिंह टीम के साथ मौके पर पहुंचकर पड़ताल की।
टीम मौके पर पहुंची तो वहां पर भारी मात्रा में दवाएं पड़ी मिलीं, ये दवाएं नहीं जल पाईं थीं। इन दवाओं को बोरी में भरवाकर कार्यालय लाया गया।
बताया जा रहा है कि जो जीवन रक्षक दवाएं मौके से मिली हैं, उन्हें बिना चिकित्सक के सलाह पर मरीज को नहीं दी जा सकती। इंजेक्शन और ग्लूकोज में मिले हैं।
अफसर दावा कर रहे हैं कि बरामद कुछ दवाएं एक्सपायरी भी हैं। इसमें महंगे इंजेक्शन और ग्लूकोज शामिल हैं। विभागीय अधिकारी मेडिकल स्टोरों और थोक विक्रेताओं की दुकानों के स्टॉक को चेक करके इन दवाओं को फेंके जाने की वजह और फेंकने वालों के नाम पते की पड़ताल करने का दावा कर रहे हैं।
फिलहाल जिस तरह दवाएं फेंकी गईं, वह औषधि निरीक्षक और उनके टीम की एक बड़ी लापरवाही है। इस तरह दवाओं के जला दिए जाने के कारण लोगों की सेहत खराब हो सकती है। वायु प्रदूषण बढ़ सकता है। मामले में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। इसको लेकर लोगों में भी नाराजगी है।
जो दवा बरामद की गईं हैं, उसकी गुरुवार को छंटनी कराई जाएगी। छंटनी के बाद पता चल पाएगा कि कितनी दवा एक्सपायरी है और कितनी दवा सही है। साथ ही इस बात की पुष्टि भी हो जाएगी कि कौन-कौन सी दवा है। वैसे इसमें जीवन रक्षक दवाओं के अलावा ग्लूकोज और इंजेक्शन भारी मात्रा में मिले हैं। दवाओं का बैच नंबर भी चेक कराया जा रहा है। मामले की जांच कराई जा रही है।
इंद्रबहादुर यादव, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी
शहर से लेकर देहात तक फैला दवा का काला कारोबार
रायबरेली। शहर से लेकर देहात तक दवा का काला कारोबार फैला है। निरीक्षण के नाम पर महज खानापूर्ति की जाती है। दवा का रेट कम होता है, जबकि मरीजों से मनमाने ढंग से पैसा वसूला जाता है।
खास बात ये है कि मेडिकल स्टोर हो या फिर थोक की दुकानें, इनका संचालन मनमाने ढंग से किया जा रहा है, लेकिन यह कोई देखने वाला नहीं है। इतना जरूर है कि विभागीय अधिकारी निरीक्षण के नाम पर कुछ मेडिकल स्टोरों पर कार्रवाई करके मामले की इतिश्री कर लेते हैं।
जिले में करीब 1500 मेडिकल स्टोर और 15 थोक की दुकानें हैं। जिस तरह मामा चौराहे पर लाखों कीमत की दवाएं जला दी गईं, उससे साबित हो गया है कि जिले में दवा का काला कारोबार किस तेजी से फैल रहा है। कई ऐसे मेडिकल स्टोर हैं, जहां पर नशीली दवाओं की बिक्री किए जाने की बात कई बार सामने आई, लेकिन कार्रवाई का नतीजा सिफर रहा। मरीजों से दवा के नाम पर मनमाना रेट वसूला जा रहा है।
मनमाने तरीके से दवा लाइसेंस भी जारी कर दिए जाते हैं। अंदरखाने की मानें तो कुछ ऐसे दवा कारोबारी हैं, जिनकी सेटिंग से ही मेडिकल स्टोरों का संचालन किया जा रहा है। इन दवा कारोबारियों का आए दिन विभागीय कार्यालय में जमावड़ा रहता है। अधिकारियों के आगे भौकाल गांठकर यह कारोबारी न सिर्फ दवा का काला कारोबार कर रहे हैं, बल्कि लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने का काम कर रहे हैं।