कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने तीन वर्ष बाद इस मामले में धोखाधड़ी का केस दर्ज कर पड़ताल शुरू कर दी है। पूरे परान मजरे ऐहार गांव निवासी बुद्धीलाल की भूमि रेल कोच कारखाने के निर्माण के लिए अधिगृहीत की गई थी।
जिसके बदले में उसे नौकरी मिलनी थी। 9 नवंबर 2012 को नौकरी के लिए आवेदन किया था। लेकिन उसकी तबियत खराब होने के कारण उसने अपनी पत्नी मायावती को नियुक्ति दिए जाने के लिए फॉर्म भरवाया था।
फॉर्म भरवाने के लिए गुरुबक्शगंज थाना क्षेत्र के डोमापुर मजरे सहजौरा गांव निवासी उसका साला रामस्वरूप भी गया था। रामस्वरूप ने धोखाधड़ी करते हुए अपनी पत्नी सरिता के नाम का फॉर्म जमा करा दिया था।
पीड़ित ने बताया कि रामस्वरूप ने अधिकारियों के साथ साठ-गांठ करके फॉर्म में लगी फोटो बदलवाकर अपनी पत्नी को नौकरी दिला दी।
सरिता लखनऊ के आलमबाग स्थित सीनियर सेक्शन इंजीनियर वर्क्स में हेल्पर के पद पर तैनात है। जब उसे पता चला तो उसने मामले की तहरीर पुलिस को दी।
पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई न होने पर पीड़ित को न्यायालय की शरण में जाना पड़ा। लालगंज कोतवाल धनंजय सिंह ने बताया कि न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कर पड़ताल शुरू कर दी।