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डीआईओएस के खाते से निकले 15.10 लाख

Thu, 14 Jul 2016 01:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ रायबरेली
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पैसा - फोटो : अमर उजाला
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जिला विद्यालय निरीक्षक के खाते से जालसाजों ने फर्जी अकाउंट खोलकर अलग-अलग नंबर के चेक के जरिए करीब 15 लाख 10 हजार 800 रुपये हड़प लिए। एसबीआई की विजिलेंस टीम ने कार्यालय पहुंचकर जांच शुरू की तो अफसर और कर्मचारी सकते में आ गए। वर्ष 2013 से लेकर 2015 तक चले जालसाजी से जहां हर कोई अंजान बना रहा।
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वहीं जालसाज  बहुत चालाकी से वारदात को अंजाम देता रहा। जिन चेकों के माध्यम से भुगतान लिया गया, इसमें पूर्व डीआईओएस पन्नाराम और वर्तमान डीआईओएस डॉ. विनय मोहन वन के हस्ताक्षर हैं। 2013 से चल रहे इस खेल का खुलासा तब हुआ, जब फर्जी चेक डिस ऑनर (बाउंस) होकर खाता धारक के घर भेज दिया गया।

खाताधारक को जब चेक मिला तो उसे प्रकरण की जानकारी हुई। उसने मामले की जांच के लिए सीबीआई को पत्र लिख दिया। सीबीआई ने पूरे मामले के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के डीजीएम विजिलेंस एके गौतम को जांच के निर्देश दिए।
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कानपुर के गजेनपुर मालव चौबेपुर निवासी भानु प्रताप सिंह पुत्र बदाम सिंह के पास बीते दिनों कानपुर स्टेट बैंक की शाखा चौबेपुर से एक चेक पहुंचा। इस पर लिखा था कि चेक डिस ऑनर कर दिया गया है। जबकि  भानुप्रताप सिंह का एसबीआई बैंक में खाता ही नहीं है।

उसने मामले की शिकायत सीबीआई से की। इसमें लिखा था कि कानपुर की चौबेपुर एसबीआई में खाता संख्या 32778606951 उनके नाम से खोला गया है। खाते में जिसकी फोटो लगी है, वह प्रतापगढ़ जिले का रहने वाला कोचिंग संचालक हरिप्रताप है।

खाता खोलने में गारंटर हरिशंकर वर्मा पुत्र मैकू वर्मा निवासी गजेनपुर मालव चौबेपुर कानपुर को बनाया गया है। सीबीआई ने मामले को गंभीरता से लेते हुए लखनऊ एसबीआई के डीजीएम विजिलेंस एके गौतम को जांच के निर्देश दिए।

डीजीएम विजिलेंस ने मंगलवार को कार्यालय पहुंचकर डीआइओएस डॉ. विनय मोहन वन को चेक नंबर समेत साक्ष्य दिखाए। यह देख सभी को होश उड़ गए। काफी खोजबीन के बाद भी डीआइओएस दफ्तर में चेकों का रिकॉर्ड नहीं मिल सका।

ऐसे में उक्त चेक नंबरों की बुक किसी लिपिक को दी गई साथ ही किस मद का धन था, इसका पता लगाया जा रहा है। इतने बड़े पैमाने में चल रहे गोलमाल में डीआईओएस कार्यालय के साथ ही बैंक कर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है।
इनसेट
इन चेकों से कराया गया भुगतान
चेक संख्या    दिनांक    भुगतान    हस्ताक्षर
56554    29 जनवरी 2013    2.15 लाख    पन्नाराम
56556    06 मार्च 2013    65 हजार     पन्नाराम
56587    17 अक्टूबर 2013    65800    पन्नाराम
56563    21 मई 2014    1.65 लाख    पन्नाराम
56882    25 अगस्त 2014    2.10 लाख    पन्नाराम
333779    17 सितंबर 2014    2.65 लाख    पन्नाराम
347898    23 दिसंबर 2014    1.80 लाख    विनय मोहन वन
347683    24 फरवरी 2014    1.75 लाख    विनय मोहन वन
339250    15 मई 2015    1.70 लाख    विनय मोहन वन

भारतीय स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक वीर रतन मोहन ने बताया कि डीआईओएस दफ्तर रायबरेली के चेकों से फर्जी तरीके से कानपुर की एसबीआई शाखा चौबेपुर में खाता खोल 15 लाख से अधिक रुपये निकाले गये है। इसकी जांच विभागीय स्तर से की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद भी पता चल सकेगा कि कौन-कौन संलिप्त है।

डीआईओएस डॉ. विनय मोहन वन ने बताया कि लखनऊ से एसबीआई डीजीएम विजिलेंस के आने पर घपले की जानकारी हो सकी। खातों के मिलान का निर्देश दिया गया है। वर्ष 2013 से अब तक की चेक बुकों की जानकारी की जा रही हैं। गड़बड़ी कहां पर हुई है, जांच के बाद ही इसका पता चल सकेगा। इसमें सभी लिपिकों से जवाब भी मांगा गया है।
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