रायबरेली। कोरोना के चपेट में आने के बाद दवाइयों के साइड इफेक्ट की वजह से दूसरी बीमारियों के पकड़ने का खतरा बढ़ गया है। खासकर ब्लैक फंगस का खतरा अब सताने लगा है।
इसकी चपेट में आने से मरीज की आंख तक निकालनी पड़ जाती है। फंगल इंफेक्शन मधुमेह (शुगर) के मरीजों को सबसे ज्यादा हो रहा है। ऐसे में शुगर रोगी कोरोना के साथ ही खुद को फंगल इंफेक्शन से बचाने का प्रयास करें।
आर्यावर्त हॉस्पिटल के निदेशक व नेत्र सर्जन डॉ. धर्मेंद्र सिंह का कहना है कि फंगल इंफेक्शन से सिर में बहुत ज्यादा दर्द, आंखों में रेडनेस, आंखों से पानी आना, आंखों के मूवमेंट का बंद हो जाना जैसी परेशानियां देखी जा रही हैं।
जब फंगस ब्रेन तक पहुंच जाता है तो स्थिति क्रिटिकल हो जाती है। डायबिटिक लोगों को ये बीमारी होने का खतरा ज्यादा होता है, क्योंकि मधुमेह रोगियों के कोरोना संक्रमित होने के बाद उनका इम्यून सिस्टम काफी कमजोर हो जाता है। ब्लैक फंगस होने पर आंखों की रोशनी चली जाती है।
नेत्र सर्जन का कहना है कि ब्लैक फंगस की शिकायतें अक्सर कोविड मरीजों के ठीक होने के बाद आ रही हैं। ब्लैक फंगस से बचा जा सकता है। इसके लिए डायबिटिक और कोरोना से ठीक हुए लोग ब्लड ग्लूकोज पर नजर रखें।
स्टेरॉयड के इस्तेमाल में समय और डोज का पूरा ध्यान रखें या फिर बंद ही कर दें। इम्यूनोमॉड्यूलेटिंग दवाओं का इस्तेमाल करना बंद कर दें। इसके साथ ही एंटीबायोटक्सि और एंटीफंगल दवाइयों का सावधानी से इस्तेमाल करें।