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सांसद सोनिया के गढ़ में कांग्रेस को उम्मीदवारों की तलाश

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रायबरेली। विधानसभा चुनाव-2022 के लिए शुक्रवार को नामांकन प्रक्रिया के दो दिन पूरे हो गए, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष व सांसद सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र में प्रत्याशियों की तलाश पूरी नहीं हो सकी।
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अब तक कांग्रेस विधानसभा क्षेत्र की आरक्षित दो सीटों पर ही प्रत्याशी उतार पाई है, जबकि छह विधानसभा सीटों में सपा, भाजपा व बसपा ने चार-चार प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं।
जिले में अब तक हुए विधानसभा चुनाव में यह पहला चुनाव है, जब नामांकन शुरू हो जाने के बावजूद बड़ी पार्टियां प्रत्याशी घोषित नहीं कर सकीं हैं। खासकर अपने गढ़ में प्रत्याशी घोषित करने में कांग्रेस बहुत पीछे है।
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जिले में अब तक हुए विधानसभा चुनावों में हर बार बड़े दलों से नामांकन शुरू होने से काफी पहले प्रत्याशी घोषित कर दिए जाते थे। नामांकन से पहले ही प्रत्याशी गुणाभाग करने के साथ मतदाताओं के बीच पहुंच जाते थे, लेकिन इस बार बड़े दल प्रत्याशी ही तय नहीं कर पा रहे हैं।
भाजपा ने सदर से अदिति सिंह और हरचंदपुर से राकेश सिंह को ही प्रत्याशी घोषित किया है। दोनों कांग्रेस के बागी विधायक हैं। भाजपा ने सरेनी से धीरेंद्र सिंह और सलोन से अशोक कोरी को प्रत्याशी बनाया है।
सपा ने भी चार सीटों से ही प्रत्याशी घोषित किए हैं। ऊंचाहार से विधायक डॉ. मनोज पांडेय, हरचंदपुर से राहुल लोधी, सरेनी से पूर्व विधायक देवेंद्र सिंह और सलोन से डॉ. जगदीश को मैदान में उतारा है।
बसपा ने बछरावां से लाजवंती कुरील, हरचंदपुर से शेर बहादुर सिंह लोधी, सरेनी से ठाकुर प्रसाद यादव, ऊंचाहार से अंजली मौर्या को प्रत्याशी घोषित किया है।
सपा, भाजपा व सपा मात्र दो-दो सीटों और कांग्रेस चार सीटों पर प्रत्याशी तय नहीं कर सकी है। अब तक कांग्रेस ने आरक्षित सीटों बछरावां से सुशील पासी और सलोन से अर्जुन पासी को प्रत्याशी बनाया है।
सदर में सपा से कई दावेदार तो हरचंदपुर में पूर्व विधायक हो सकते हैं बागी
हरचंदपुर विधानसभा सीट से सपा से विधायक रह चुके प्रबल दावेदार सुरेंद्र विक्रम सिंह का टिकट काट दिया गया है। वह बागी होने के साथ किसी अन्य दल में जाकर मैदान में उतर सकते हैं।
सदर विधानसभा सीट से कई लोग दावेदारी कर रहे हैं। शायद इसी कारण से अब तक सदर सीट से प्रत्याशी घोषित नहीं हो सका है। ऊंचाहार विधानसभा सीट से कांग्रेस को अब तक प्रत्याशी नहीं मिल पाया है। इस सीट पर भाजपा के टिकट को लेकर असमंजस कायम है।
विधानसभा क्षेत्र की सीटों पर अपनों का विरोध झेलेंगे प्रत्याशी
पूर्व के चुनाव की तरह इस बार का चुनाव प्रत्याशियों के लिए आसान नहीं है। ज्यादातर प्रत्याशियों को अपनों का विरोध झेलना पड़ सकता है। लंबे समय से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दावेदार टिकट कटने के बाद अंदर ही अंदर गुल खिलाने के मूड में हैं। नेताओं में आपसी खटास के कारण शायद पार्टियां प्रत्याशियों की घोषणा करने में देरी कर रही हैं।
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