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मांग का मिल रहा आधा पानी, किसान कैसे करें धान की रोपाई

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रायबरेली। बारिश न होने से जिले में किसान धान की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। मांग के अनुरूप पानी न मिलने की वजह से नहरों और माइनरों में भरपूर पानी नहीं पहुंच रहा है। ज्यादातर सरकारी नलकूप खराब हैं तो निजी नलकूप बिजली संकट की वजह से पूरी क्षमता से नहीं चल पा रहे हैं। ऐसे में धान की रोपाई का लक्ष्य पूरा होना आसान नहीं दिख रहा है। धान की रोपाई और बोआई पिछड़ रही है। इसका असर उत्पादन पर पड़ेगा।
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कुछ किसानों ने नलकूपों से बेड़न तैयार कर ली और रोपाई भी कर दी, लेकिन अब उनके सामने पानी का संकट खड़ा है। हालात यह हैं कि किसानों को धान की नर्सरी सूखने से बचाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।
जिले में छोटी-बड़ी 435 नहरें व माइनरें हैं, जिनकी लंबाई 1235 किलोमीटर है। इनसे करीब दो लाख से ज्यादा किसान सिंचाई करते हैं। इसमें ज्यादातर नहरों में शारदा सहायक और डलमऊ पंप कैनाल से पानी पहुंचता है। न तो शारदा सहायक नहर में भरपूर पानी आ रहा है और न ही डलमऊ पंप कैनाल में पूरी क्षमता से पंप चल पा रहे हैं।
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इस वजह से किसान सिंचाई की समस्या से जूझ रहे हैं। कुछ नहरों में पानी पहुंचा तो कुछ जगह अभी सूखी पड़ी है। इससे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस साल जिले में एक लाख 12 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की रोपाई होनी है। सूखे जैसे आसार की वजह से इस लक्ष्य को पूरा करना मुश्किल हो रहा है।
20 की जगह चल रहे छह पंप
डलमऊ पंप कैनाल में गंगा से पानी उठाकर नहरों तक पहुंचाने के लिए पंप लगे हैं। 20 पंप चलने से सभी नहरों में भरपूर पानी पहुंचता है, लेकिन यहां पर महज छह पंप चल रहे हैं। इसमें भी आए दिन एक या दो पंप बंद कर दिए जाते हैं। इस वजह से डलमऊ, दीनशाह गौरा, जगतपुर, ऊंचाहार, रोहनिया समेत कई ब्लॉकों में पानी नहीं पहुंच रहा है। सिंचाई खंड छह के अभियंता पंपों को पूरी क्षमता से चलाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। सिंचाई खंड छह के एक्सईएन विनोद कुमार ने बताया कि गंगा का जलस्तर कम होने की वजह से पंप पूरी क्षमता से नहीं चल पा रहे हैं।
खंड 45 के हालात सबसे खराब
सिंचाई विभाग खंड 45 के अंतर्गत 73 माइनर और रजबहे हैं। इन नहरों डीह, छतोह ब्लॉक क्षेत्र में पानी पहुंचता है। माइनरों की सफाई ठीक से नहीं कराई गई। यही वजह है कि टेल भाग तक पानी ही नहीं पहुंच पाता है। खास बात यह है कि डीह जिलेदारी के कर्मचारी नहरों की निगरानी करने के बजाय जिलेदारी कार्यालय में बैठे रहते हैं। यही वजह है कि डीह के किसान नहरों में बंधा डाल देते हैं, परशदेपुर जिलेदारी के अंतर्गत आने वाली नहरों तक पानी ही नहीं पहुंच पाता। सिंचाई खंड के अभियंता इसको लेकर गंभीर नहीं है। खंड 45 के एक्सईएन रमाशंकर ने बताया कि इस खंड के अंतर्गत आने वाली नहरों में पानी जौनपुर ब्रांच से मिलता है। पानी की क्षमता बढ़ाने के लिए संबंधित अधिकारियों को लिखापढ़ी की गई है।
रोपाई की कौन कहे, धान की नर्सरी बचाना मुश्किल
आषाढ़ महीने में जेठ जैसी गर्मी है। इससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ झलक रही हैं। किसान धान की रोपाई नहीं बल्कि नर्सरी बचाने को परेशान हैं। क्योंकि पानी के अभाव में वह सूख रही है। डीह ब्लॉक क्षेत्र के किसान राजकुमार, बैजनाथ ने बताया कि ब्लॉक क्षेत्र के ज्यादातर किसान नहरों के सहारे खेती करते हैं, लेकिन नहरों में धूल उड़ रही है। कुछ जगह पानी आया, लेकिन फिर बंद कर दिया गया। रामेश्वर, तुलाराम अग्रहरि ने बताया पानी के अभाव में धान की नर्सरी सूख रही है। सिंचाई के लिए पाइप फैलाकर दूर से पानी लाना पड़ता है। दीनशाह गौरा ब्लॉक क्षेत्र के किसान अवध कुमार, संतराम यादव ने बताया कि धान की नर्सरी रोपाई के लिए तैयार है। पानी के अभाव में रोपाई नहीं कर पा रहे हैं।
70 फीसदी पिछड़ी रोपाई, पड़ेगा उत्पादन पर असर
अब तक 70 फीसदी धान की रोपाई या फिर बोआई होनी चाहिए, लेकिन बारिश न होने के कारण रोपाई का कार्य पिछड़ रहा है। निजी संसाधन से भी भरपूर पानी नहीं मिल रहा है। किसानों ने किसी तरह बेड़न तैयार कर ली, लेकिन खेतों में पानी न होने से रोपाई नहीं हो पा रही है। कायदे से 25 से 30 दिन में बेड़न को तैयार खेतों में लगवा देना चाहिए, लेकिन नहीं लग पा रही है। इस वजह से बेड़न ज्यादा लंबी हो रही है और रोपाई का कार्य पिछड़ रहा है। इसका असर उत्पादन पर पड़ेगा।
आरके कनौजिया, कृषि वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र दरियापुर
कम पानी के बावजूद पहुंचा रहा हैै पानी
मांग के अनुरूप कम पानी मिल रहा है। इस वजह से एक साथ सभी नहरें चलाना संभव नहीं है। फिर भी सभी नहरों में रोक-रोक पानी पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही किसानों को प्रेरित किया जा रहा है कि वह जरूरत के हिसाब से पानी खेत में लगाएं। अनावश्यक कुलाबा खुला न छोड़े, ताकि टेल भाग के किसानों को भी पानी मिल सकें।
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-हेमंत कुमार वर्मा, एक्सईएन, सिंचाई खंड दक्षिणी
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