रायबरेली। एफसीआई गोदामों से सीधे कोटे की दुकानों पर राशन पहुंचाने काम सुस्त है। कोटे की दुकानों पर इस माह राशन वितरण का काम शुरू भी हो गया है, लेकिन राशन न पहुंच पाने के कारण गरीबों को परेशान होना पड़ रहा है।
अब तक लक्ष्य के सापेक्ष 22 फीसदी ही राशन पहुंच पाया है। गरीबों में 13 हजार मीट्रिक टन राशन के वितरण का लक्ष्य है, लेकिन अब तक 2900 मीट्रिक टन अनाज ही कोटे की दुकानों पर पहुंच सका है। विभाग जैसे-जैसे पहुंचेगा वैसे-वैसे राशन वितरण का प्रयास कर रहा है।
जिले की सभी 1145 कोटे की दुकानों पर सिंगल डोर स्टेप डिलवरी सिस्टम के माध्यम से राशन पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। पिछले जून से ही यह व्यवस्था लागू होनी थी, लेकिन खामियों के कारण काम जुलाई माह में आरंभ हुआ।
इसके लिए जिले में आठ ठेकेदारों को काम दिया गया है। शासन ने राशन की कालाबाजारी को रोकने के लिए यह प्रक्रिया शुरू की है, लेकिन राशन वितरण का काम शुरू होने के बाद भी कोटे की दुकानों पर राशन नहीं पहुंच सका है। अब तक मात्र 22 प्रतिशत ही राशन कोटे की दुकानों तक पहुंच पाया है।
ठेकेदारों की सुस्ती और मनमानी के कारण काम में तेजी नहीं आ रही है। इससे कोटेदारों के साथ ही गरीबों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दुकानों पर राशन न पहुंचने के कारण कार्डधारकों को दुकानों से वापस लौटना पड़ रहा है, लेकिन ठेकेदार एफसीआई गोदामों से समय से राशन दुकानों पर नहीं पहुंचा पा रहे हैं। इसका खामियाजा गरीबों को भोगना पड़ रहा है।
इसी महीने से सिंगल डोर स्टेप डिलवरी सिस्टम लागू हो गया है। पहला माह होने के कारण सीधे एफसीआई गोदाम से कोटे की दुकानों पर राशन पहुंचने में देरी हो रही है। शासन से जैसे-जैसे राशन पहुंचे, वैसे-वैसे राशन वितरण के आदेश दिए हैं। समय से कोटे की दुकानों पर राशन पहुंचकर वितरण कराया जाएगा।
विमल कुमार शुक्ला, जिला पूर्ति अधिकारी