फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कमीशनबाजी का खेल, 10 साल में ही ढह गए गरीबों के आशियाने

विज्ञापन
विज्ञापन
रायबरेली। गरीबों के लिए बनवाए गए फ्लैट 10 सालों में ही जर्जर हो गए। कमीशनबाजी के इस खेल में फ्लैट की छतें ढह गईं हैं। कई फ्लैट खंडहर में तब्दील हो गए हैं। परिवार की सलामती के लिए 45 लोग दूसरे स्थानों पर पलायन कर गए।
विज्ञापन

वहीं यहां रह रहे अन्य परिवारों पर मौत का खतरा हमेशा मंडराता रहता है। मामला संज्ञान में आने के बाद डीएम ने जांच के लिए एक टीम गठित कर दी है। इससे हड़कंप मच गया है।
सांसद सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र में गरीबों को निशुल्क आवास देने और उन्हें बसाने के लिए आईएचएसडीपी (इंट्रीग्रेटेड हाउसिंग एंड स्लम डेवलपमेंट प्रोग्राम) के तहत शहर से सटे चक धौरहरा में कॉलोनी बनाई गई थी।
विज्ञापन

कॉलोनी में 100 फ्लैट बनवाए गए थे। 90 पात्र लोगों को आवास दिए गए थे। डूडा की देखरेख में फ्लैट निर्माण पर करीब सवा करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। वर्ष 2010 में डूडा ने इस कॉलोनी को नगर पालिका को हैंडओवर कर दिया।
निर्माण कार्य में मानक का प्रयोग न करने और कमीशनबाजी की वजह से 10 साल में ही फ्लैट की छतें ढह गईं हैं। दीवारें दरक गईं हैं। बारिश में घरों में पानी टपकता है। रात गुजारने के लिए लोगों को बाहर सोना पड़ता है।
दहशत के चलते 45 परिवार दूसरे स्थानों पर पलायन कर गए हैं। बाकी यहां रहने वाले परिवार दहशत में हैं, लेकिन उनके पास रहने के लिए कोई दूसरा स्थान नहीं हैं। मजबूरन वे अपने परिवार के साथ मौत के साये में रहने को मजबूर हैं।
फ्लैट देखे नहीं और कर लिए हैंडओवर
चक धौरहरा में बनवाई गई कॉलोनी में डूडा और नगर पालिका के अफसरों की लापरवाही से इंकार नहीं किया जा सकता। पहले कमीशनबाजी के चक्कर में डूडा के अफसरों ने कॉलोनी को कार्यदायी संस्था से हैंडओवर किया।
फ्लैट मानक से बनाए गए या नहीं, यह नहीं देखा। वर्ष 2010 में नगर पालिका के अफसरों ने भी कमीशनबाजी के चक्कर में कॉलोनी को हैंडओवर कर लिया। नगर पालिका के अफसरों ने भी आननफानन में कॉलोनी को हैंडओवर करके मामले की इतिश्री कर ली। ऐसे में जरूरत है कि जांच करके कार्यदायी संस्था के साथ ही दोषी अफसरों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए, ताकि गरीबों के नाम पर पैसा डकारने वाले अफसर बेनकाब हो सके।
पॉलीथिन लगाकर गुजर रहीं रातें
अमर उजाला की टीम पहुंची तो कॉलोनी में रहने वाले गरीबों का दर्द छलक पड़ा। अशोक कुमार कहते हैं कि फ्लैट में रहने का सपना था। बाहर से फ्लैट ठीकठाक थे। कुछ ही साल में फ्लैट की छतें ढह गई। उनकी पत्नी मरते-मरते बची।
उनकी जमीन भी चली गई। अब वह परिवार साथ कहां जाएं, यह कुछ सूझ नहीं रहा है। भोली सोनकर कहती हैं कि बारिश होने पर फ्लैट में पानी भर जाता है। छतें ढह गई हैं। इसलिए पॉलिथीन रखकर रात गुजारनी पड़ती हैं। उनकी पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं हैं। फ्लैट बनाने में कमीशनबाजी के चलते आवास जर्जर हुए।
गरीबों को मुफ्त में आवास दिलाने के लिए चकधौरहरा में कॉलोनी बनवाई गई थी। वर्ष 2010 में डूडा ने नगर पालिका को कॉलोनी हैंडओवर किया था। साफ-सफाई की जिम्मेदारी नगर पालिका की थी, बाकी की जिम्मेदारी डूडा की थी।
निर्माण कार्य में मानक का ध्यान नहीं दिया गया। जांच के लिए डीएम के निर्देश पर सिटी मजिस्ट्रेट ने तीन सदस्यीय टीम गठित की है, जो कॉलोनी में जाकर जांच कर रही है कि कितने वैध और कितने अवैध फ्लैट हैं। जांच रिपोर्ट मिलने पर कॉलोनी में रह रहे परिवारों को दूसरे स्थानों पर बसाया जाएगा।
विज्ञापन

डॉ.आशीष सिंह, ईओ, नगर पालिका
गरीबों को पक्का आवास दिलाने के लिए आईएचएसडीपी के तहत शहर से सटे चकधौरहरा में कॉलोनी बनवाई गई थी। कॉलोनी को नगर पालिका को हैंडओवर कर दिया गया था।
मुनींद्र कुमार सिंह, परियोजना अधिकारी, डूडा
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें