रायबरेली। कलेक्ट्रेट स्थित अभिलेखागार में अभिलेखों को खुरचकर नाम बदलने और पन्ने गायब करने की जांच में पुष्टि के बाद भी एफआईआर कराने में आनाकानी हो रही है।
हालांकि डीएम ने बीती नौ जून को ही मुकदमा दर्ज कराने के आदेश दिए थे, लेकिन नौ जुलाई तक भी मुकदमा दर्ज नहीं हो सका है। राजस्व अभिलेखापाल को शहर कोतवाली में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराने के आदेश हैं, लेकिन कर्मचारी आनाकानी कर रहा है।
अभिलेखागार के अभिलेखों में हेराफेरी और पन्ने गायब करने के मामले की जांच एडीएम (वित्त एवं राजस्व) प्रेमप्रकाश उपाध्याय ने की थी। जांच में सलोन क्षेत्र के प्यारेपुर, नुरुद्दीनपुर और जौदहा गांवों की जमीनों से संबंधित अभिलेखागार में रखे दस्तावेजों में हेराफेरी और पन्ने गायब करने के मामले सामने आए थे।
एडीएम ने अपनी जांच में अभिलेखागार के सेवानिवृत्त कर्मचारी नवल किशोर शुक्ला, एआरके देही कृष्ण बहादुर सिंह, चपरासी जफर आलम के अलावा आनंद कुमार सिंह, सुषमा देवी को दोषी पाया था। रिपोर्ट आने के बाद डीएम माला श्रीवास्तव ने नौ जून को ही मुकदमा दर्ज कराने के आदेश दिए थे।
कर्मचारी संघ के अनुरोध पर प्रकरण की दोबारा जांच के लिए एडीएम (प्रशासन) अमित कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट पल्लवी मिश्रा व चकबंदी अधिकारी की टीम को जांच दी गई। टीम की जांच में भी फर्जीवाड़े की पुष्टि हो गई, लेकिन अब तक मुकदमा दर्ज नहीं कराया जा सका।
अभिलेखागार की राजस्व अभिलेखापाल लुकइया बेगम को संबंधितों के खिलाफ कोतवाली में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराने के आदेश दिए हैं, लेकिन उन्होंने अब तक मुकदमा दर्ज नहीं कराया है। एडीएम (प्रशासन) अमित कुमार का कहना है कि जांच में भी फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई है। दोषियों पर जल्द मुकदमा दर्ज होगा।