रायबरेली। कानपुर से वर्ष 2003 में प्रारंभ मृत देहदान कराने के अनूठे आंदोलन युग दधीचि देहदान अभियान से शुक्रवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भी जुड़ गया। अब एमबीबीएस छात्र-छात्राओं को पढ़ाई में राहत मिलेगी। देहदान के लिए लोगों को प्रेरित किया जाएगा।
एम्स के एनॉटमी विभाग में शुक्रवार को युग दधीचि देहदान अभियान के प्रमुख मनोज सेंगर ने कहा कि 2003 से अब तक वह नौ मेडिकल कॉलेजों को देहदान के माध्यम से 237 शव दिला चुके हैं।
पहली बार 15 नवंबर 2003 को कानपुर में विशाल गायत्री महायज्ञ के अवसर पर स्वयं, पत्नी माधवी सेंगर सहित परिवार के नौ लोगों का देहदान का संकल्प करके अभियान को शुरू किया।
उन्होंने बताया कि अब तक प्रयागराज, अंबेडकरनगर, केजीएमयू लखनऊ, एम्स गोरखपुर, अयोध्या, आयुर्विज्ञान संस्थान सैफई, आगरा, वर्धमान महावीर कॉलेज, दिल्ली को भी देह समर्पित की गईं है।
वह कोई एनजीओ नहीं चला रहे हैं। पत्नी के साथ मिलकर देहदान के अभियान को सफल बनाने का प्रयास कर रहे हैं। एम्स या उनसे संपर्क करके कोई भी देहदान के लिए फॉर्म भर सकता है।
एम्स के शरीर रचना विभाग (एनॉटमी) के विभागाध्यक्ष प्रो. रजत शुभ्रा दास ने कहा कि एम्स की ओर से लगातार देहदान के लिए लोगों से अपील की जा रही है। एमबीबीएस छात्रों की पढ़ाई के लिए शव की बहुत जरूरत होती है।
अभियान से जुड़ने के बाद एम्स को एमबीबीएस छात्रों की पढ़ाई के लिए शवों की जरूरतें पूरी हो जाएंगी। लोग अधिक से अधिक देहदान करें। इस मौके पर डॉ. तरुण प्रकाश माहेश्वरी, डॉ. कैलाश दामोदर, डॉ. शुभांगी यादव, डॉ. अनिल श्रीवास्तव, डॉ. टी. नवीन मौजूद रहे।